बड़ी खबर: दो सौ दिन हुए पूरे, नहीं बहाल हो पाये निलंबित आईएएस अमरनाथ उपाध्याय

डीएन संवाददाता

जिले स्तर के दो नेताओं के उकसावे पर महराजगंज पाप कांड को अंजाम देने वाले मुख्य नायक और तत्कालीन जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय को निलंबित हुए दो सौ दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन ये हर दर पर गिड़गिड़ाने के बावजूद आज तक बहाल नहीं हो पाये हैं। डाइनामाइट न्यूज़ एक्सक्लूसिव:

बहाली को बेकरार निलंबित आईएएस अमरनाथ उपाध्याय
बहाली को बेकरार निलंबित आईएएस अमरनाथ उपाध्याय

लखनऊ/महराजगंज: दो सौ दिनों से निलंबन की काल-कोठरी में भटक रहे आईएएस अमरनाथ उपाध्याय उस मनहूस घड़ी को कोस रहे होंगे, जिसमें इन्होंने महराजगंज के जिलाधिकारी का चार्ज लिया था।

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दो जिला स्तरीय नेताओं के बहकावे में आकर एक के बाद एक पाप कांड को अंजाम देने की बड़ी भूल करने वाले अमरनाथ उपाध्याय को अब समझ में आ रहा है कि जिन नेताओं को भगवान समझ उन्होंने एक के बाद एक पाप किया उन दोनों ने कैसे इनका इस्तेमाल किया?   

सीएम के सबसे प्रिय प्रोजेक्ट गऊ माता का चारा चुराकर खाने के आरोप में निलंबित हुए डीएम एक के बाद एक जांच का सामना कर बेहाल हो चुके हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि कैसे अपने आपको बेगुनाह साबित करें। 

दो नेताओं ने कैसे किया अमरनाथ को इस्तेमाल? याद कर पछता रहे हैं पूर्व डीएम

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आज भी यह सवाल मुंह बाये खड़ा है कि 2538 गोवंश मधवलिया गो-सदन में थे तो कैसे मौके पर सिर्फ 954 गोवंश मिले, आखिर शेष 1584 गायें किस कसाई को बेच दी गयीं? इसकी विस्तार से हो रही जांच में कई नेताओं की गर्दन भी इसमें फंसेगी। 

अमरनाथ को लगा था कि ये भ्रष्टाचार करेंगे, गऊ माता का चारा-दाना-पानी चुराकर खाते रहेंगे और इनके जिला स्तरीय राजनीतिक आका इन्हें बचाते रहेंगे लेकिन आज शायद अमरनाथ की आंखों से यह भ्रमजाल उतर चुका है।

अमरनाथ अब पश्चाताप की आग में जल रहे हैं। 20 मार्च को दोपहर साढ़े 12 बजे राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन के पंचम तल पर ये डाइनामाइट न्यूज़ से मिले। शासन के दो बड़े अफसरों के सामने बैठ ये अपने गुनाहों पर बुरी तरह लज्जित दिखे। इनके शब्दों में “लगता है ये मेरा प्रारब्ध था, पूर्व जन्म में मेरा कोई पाप था, जिसे अब मैं भोग रहा हूं, लेकिन इसमें मेरा कोई दोष नहीं, मैं तो जिले के दो नेताओं के बहकावे का शिकार हो गया और अंजाने में पाप कर बैठा।” 

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पूर्व जिलाधिकारी द्वारा गैरविधिक तरीके से जिस 328 एकड़ बेशकीमती जमीनों को अपने चहेतों के नाम किया गया था, उसका पट्टा निरस्त कर दिया गया है। 
 

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