मंत्री विक्रमादित्य बनाम IPS-IAS अफसर, दिल्ली पहुंचा विवाद; गृह मंत्रालय से कार्रवाई की मांग

हिमाचल प्रदेश में मंत्री और अफसरों के बीच चल रहा विवाद अब संवैधानिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। IPS एसोसिएशन के प्रस्ताव के खिलाफ गृह मंत्रालय को शिकायत भेजी गई है, जिसमें इसे प्रशासनिक विद्रोह और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 17 January 2026, 5:56 PM IST
google-preferred

New Delhi: सत्ता के गलियारों में जब टकराव खुलेआम सड़कों पर उतर आए और अफसरशाही पर ‘विद्रोह’ जैसे शब्द इस्तेमाल होने लगें, तो मामला सिर्फ बयानबाजी का नहीं रह जाता। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कुछ ऐसा ही माहौल बनता नजर आ रहा है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और IAS-IPS अधिकारियों के बीच शुरू हुआ विवाद अब संवैधानिक संकट की शक्ल लेता दिख रहा है। आरोप, पलटवार और अब सीधे केंद्र सरकार तक पहुंची शिकायत ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है।

गृह मंत्रालय तक पहुंचा विवाद

इस पूरे प्रकरण में शिमला निवासी कैप्टन अतुल शर्मा ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजकर IPS अधिकारी संघ के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने इस विवाद को संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ प्रशासनिक विद्रोह करार दिया है। उनका कहना है कि IPS एसोसिएशन द्वारा पारित प्रस्ताव न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार की सर्वोच्चता को चुनौती देता है।

सचिवालय या पुलिस मेस?

कैप्टन अतुल शर्मा ने अपने पत्र में एक तीखा सवाल उठाया है कि आखिर हिमाचल प्रदेश का शासन सचिवालय से चलेगा या किसी पुलिस मेस के आंतरिक फैसलों से। उन्होंने इसे कार्यपालिका के विशेषाधिकार में सीधा हस्तक्षेप बताया और कहा कि इस तरह के प्रस्ताव सरकार के अधिकारों को कमजोर करते हैं। उनका तर्क है कि अफसरों का काम नीतियों को लागू करना है, न कि यह तय करना कि वे किस मंत्री के साथ काम करेंगे।

सेवा आचरण और संविधान का मुद्दा

पत्र में IPS एसोसिएशन के प्रस्ताव को ऑल इंडिया सर्विसेज के सेवा आचरण नियमों के खिलाफ बताया गया है। कैप्टन अतुल शर्मा ने संविधान के प्रति ली गई शपथ का हवाला देते हुए कहा कि किसी निजी संगठन के बैनर तले संस्थागत आहत का हवाला देकर आधिकारिक जिम्मेदारियों से दूरी बनाना गंभीर अनुशासनहीनता है। उन्होंने इसे प्रशासनिक दबाव और ब्लैकमेलिंग के समान करार दिया है।

रिटायर्ड IPS का भी विरोध

उधर सोशल मीडिया पर सेवानिवृत्त IPS अधिकारी विनोद धवन ने भी IPS एसोसिएशन के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान दोनों के खिलाफ बताया। विनोद धवन का कहना है कि IPS जैसी प्रीमियर सेवा से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह सार्वजनिक मंच पर ऐसे बयान दे, जो उसकी गरिमा, प्रतिष्ठा और संवैधानिक दायित्वों को कमजोर करें।

बढ़ता टकराव, बढ़ती चिंता

फिलहाल यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। मंत्री और अफसरों के बीच चल रही यह रस्साकशी अब कानून, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था तक पहुंच चुकी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गृह मंत्रालय इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या हिमाचल में यह टकराव किसी बड़े फैसले की ओर बढ़ेगा।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 17 January 2026, 5:56 PM IST

Advertisement
Advertisement