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पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने राहुल की कराई थी मुलाकात (Img: Dynamite News)
नई दिल्ली: पांच दिन से उत्तर प्रदेश की फिजाओं में युवा ड्रोन इनोवेटर राहुल सिंह की मौत का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है। लखनऊ के एक प्रसिद्ध होटल में 14 जुलाई को संदिग्ध परिस्थितियों में राहुल का शव बरामद हुआ था।
राहुल उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद के कोठीभार थाने के असमन छपरा गांव का मूल निवासी था। ड्रोन इनोवेटर के रूप में राहुल ने बीते 11 वर्षों में ड्रोन तकनीक, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में कई कार्य करते हुए कई प्रोजेक्ट विकसित किए। इसके लिए उन्हें विभिन्न स्तरों पर पुरस्कार भी मिले।
मृतक राहुल सिंह ने अपनी मौत से करीब एक महीने पहले, 12 जून को, तीन पन्नों की लिखित शिकायत (संख्या-50018526000292) गोरखपुर जोन के एडीजी से की थी। जिस पर अपर पुलिस महानिदेशक ने बस्ती के एसपी को लिखित आदेश देते हुए कार्रवाई करने को कहा तथा समूचे मामले की रिपोर्ट तलब की।
राहुल की शिकायत के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने पिछले साल 30 अगस्त को दिल्ली के बेहद पॉश इलाके न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित अपने घर पर चन्द्रभूषण मिश्रा नामक व्यक्ति से उसकी मुलाकात कराई। इस मुलाकात का उद्देश्य 'विकसित भारत' के अंतर्गत ड्रोन तकनीक एवं स्वदेशी नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए काम करना था।
मुलाकात में चन्द्रभूषण मिश्रा ने अपने तीन बच्चों को भी उक्त ड्रोन प्रोजेक्ट से जोड़ने की बात की। इसके बाद ड्रोन प्रोजेक्ट को मिलकर आगे बढ़ाने के लिए राहुल को 85 लाख रुपये दिए जाने की बात तय हुई थी।
उसके बाद चन्द्रभूषण अक्सर राहुल के घर आते-जाते रहे और दोनों के संबंध प्रगाढ़ होते गये। चन्द्रभूषण ने राहुल को एक मोबाइल भी दिया और पिछले साल 17 सितंबर को राहुल के खाते में 62 लाख रुपये ट्रांसफर किए। राहुल की शिकायत के मुताबिक, इस बीच चन्द्रभूषण बार-बार उससे कहते रहे कि इस प्रोजेक्ट में उनके बच्चों को प्रमुख रूप से लाभ और स्थान मिलना चाहिए।
इसके बाद तारीख आई 27 दिसंबर की। राहुल को चन्द्रभूषण मिश्रा के नोएडा स्थित सेक्टर-5 के कार्यालय में प्रोजेक्ट के प्रस्तुतीकरण के लिए बुलाया गया। यहां पर यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा तथा चन्द्रभूषण के तीनों बच्चे भी मौजूद थे। राहुल ने कहा कि प्रोजेक्ट की डिटेल्स वह पेन ड्राइव के माध्यम से दिखाएगा, जिस पर इन लोगों ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और दबाव बनाकर प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण एवं संबंधित सामग्री व्हाट्सऐप पर ले ली।
इसके बाद राहुल ने शेष 23 लाख रुपये जब मांगे, तो चन्द्रभूषण ने उन्हें देने से मना कर दिया और पहले दिए गए 62 लाख रुपये वापस मांगने लगे।
इस साल 24 फरवरी को चन्द्रभूषण कुछ लोगों के साथ राहुल के घर आया और उसके माता-पिता के साथ अभद्रता की। चन्द्रभूषण ने कहा कि राहुल उसका पैसा लौटा दे, नहीं तो उसे झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा। इसके बाद से ही आए दिन फोन कॉल तथा व्हाट्सऐप कॉल पर पूरे परिवार को धमकियां देने का सिलसिला शुरू हो गया।
राहुल ने अपनी मृत्यु से पहले एडीजी को लिखे शिकायती पत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य लिखा कि 8 अप्रैल को दोपहर 1:28 बजे यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की मिस्ड कॉल उसे मिली। इसके बाद उसने 1:29 बजे दुर्गा शंकर को वापस कॉल किया और दोनों के बीच 6 मिनट 17 सेकेंड तक बातचीत हुई।
बातचीत में दुर्गा शंकर ने कहा कि वह चन्द्रभूषण को पैसे वापस दे दे, नहीं तो उसके बड़े भाई के विवाह में समस्या पैदा होगी तथा कानूनी दिक्कतें आएंगी। इसके तुरंत बाद चन्द्रभूषण ने व्हाट्सऐप कॉल कर कहा कि उसे झूठे मामले में फंसा कर जेल भिजवा देंगे।
राहुल ने लिखा है कि इस उत्पीड़न के चलते वह और उसका परिवार अत्यधिक भयभीत है और मानसिक दबाव में है। राहुल ने एडीजी को मुलाकात संबंधी गवाहों तथा अन्य आवश्यक सबूत, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आदि भी भेजे।
हैरानी की बात यह है कि राहुल की 12 जून की इस विस्तृत शिकायत पर बस्ती पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उल्टे, इस शिकायत के अगले ही दिन, 13 जून की शाम 5:49 बजे, बस्ती पुलिस ने चन्द्रभूषण की तहरीर पर नगर थाने में एफआईआर संख्या 164/2026, धारा 351(2), 316(2) बीएनएस के अंतर्गत राहुल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इस एफआईआर के बाद राहुल और उसके परिजनों के उत्पीड़न का सिलसिला प्रारंभ हो गया।
और अंत में वही हुआ, जिसकी आशंका राहुल ने पुलिस को अपनी शिकायत में जताई थी। 14 जुलाई को लखनऊ में प्रतिभाशाली राहुल की लाश बरामद हुई।
इसके बाद परेशान परिजनों ने जगह-जगह न्याय की गुहार लगानी शुरू की। तब जाकर किसी तरह तीन दिन बाद लखनऊ पुलिस ने विभूति खंड थाने में 17 जुलाई की शाम 7:20 बजे एफआईआर संख्या 243/2026 के अंतर्गत धारा 108 बीएनएस में मृतक के भाई रोहित सिंह की तहरीर पर चन्द्रभूषण और उनके तीन बच्चों तपिष, उदित तथा तारिणी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया।
समूचे मामले में चन्द्रभूषण मिश्रा का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं। दिल्ली में एक प्रदर्शनी के दौरान राहुल से उनकी मुलाकात हुई और जरूरत के कारण उन्होंने राहुल को पैसे दिए, लेकिन बाद में राहुल उन्हें लौटाने से मुकरने लगा।
इस बारे में डाइनामाइट न्यूज़ ने सवालों के घेरे में आए यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन वे हर बार बचने की कोशिश करते रहे। डाइनामाइट न्यूज़ ने उनके मोबाइल पर कई बार फोन किया। जब उन्होंने फोन नहीं उठाया, तो उन्हें व्हाट्सऐप पर संदेश भेजकर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन फिर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
इसके बाद डाइनामाइट न्यूज़ के खोजी रिपोर्टरों की टीम दुर्गा शंकर के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित घर पर गई, ताकि उनका पक्ष जाना जा सके, लेकिन एक बार फिर उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। जैसे ही डाइनामाइट न्यूज़ को दुर्गा शंकर का पक्ष मिलेगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
दुर्गा शंकर उत्तर प्रदेश कैडर के 1984 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। ढाई साल तक यूपी के मुख्य सचिव रहने से पहले वे भारत सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय में साढ़े चार साल तक सचिव के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वे तीन साल तक इसी मंत्रालय में बतौर एडिशनल सेक्रेटरी भी तैनात रहे। 4 दिसंबर 1961 को जन्मे दुर्गा शंकर मूल रूप से यूपी के मऊ जिले के निवासी हैं। वे सोनभद्र और आगरा के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं।
Location : New Delhi
Published : 19 July 2026, 3:38 PM IST
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