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संसद के मानसून सत्र में पांच नए विधेयक पेश होंगे (Img: Dynamite News)
New Delhi: संसद का मानसून सत्र, सोमवार 20 जुलाई से शुरू होते ही केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। सरकार के एजेंडे में ऐसे प्रस्ताव शामिल हैं, जिनका असर देश की अर्थव्यवस्था, न्याय व्यवस्था, कारोबार और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े नियमों पर पड़ सकता है। पांच नए विधेयकों को लेकर संसद के अंदर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।
18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026, सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 और एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेगी।
मानसून सत्र के पहले दिन जिस विधेयक पर सबसे ज्यादा चर्चा होने की संभावना है, वह है राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे राज्यसभा में पेश करेंगे। इस प्रस्ताव के जरिए 1971 के कानून में बदलाव किया जाना है। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' के अपमान को अपराध माना जाता है। अब प्रस्तावित संशोधन में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को भी इसी तरह का कानूनी संरक्षण देने की बात कही गई है।
अगर यह विधेयक पास होता है तो 'वंदे मातरम्' के गायन में बाधा डालने या इसके अपमान से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। सरकार यह कदम ऐसे समय उठा रही है जब देश में 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए पहले जारी अध्यादेश को कानून का रूप देना चाहती है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना बताया जा रहा है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार विदेशी निवेशकों को राहत देने की दिशा में कदम उठा चुकी है। इसी क्रम में सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर कुछ कर छूट का प्रावधान किया गया था। अब सरकार इसे स्थायी कानून का रूप देने की तैयारी में है।
न्याय व्यवस्था से जुड़े एक बड़े बदलाव के तहत सरकार सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक भी लाएगी। सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि इससे लंबित मामलों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी और न्याय प्रक्रिया को गति मिलेगी।
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छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए भी सरकार नया प्रस्ताव लेकर आ रही है। एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना, भुगतान में देरी से जुड़े मामलों का समाधान मजबूत करना और राज्यों की भूमिका बढ़ाना है। इसके अलावा जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून में भी बदलाव प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जाएगा।
मानसून सत्र में सिर्फ विधायी कामकाज ही नहीं बल्कि राजनीतिक गर्मी भी देखने को मिल सकती है। सरकार जहां अपने विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस मानसून सत्र में आने वाले दिनों में कई बड़े फैसलों पर देश की नजर रहने वाली है।
Location : New Delhi
Published : 19 July 2026, 8:14 PM IST