‘आंकड़ों की बाजीगरी या असली विकास?’ 7.8% GDP पर मायावती का सवाल, बोलीं- गरीब जनता कब खुशहाल होगी?

बसपा सुप्रीमो मायावती ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ के सरकारी आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी तेज विकास दर का लाभ देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों को कितना मिला। मायावती ने GDP के साथ महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी की जमीनी स्थिति पर भी सवाल उठाए।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 4 September 2026, 7:37 PM IST
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Lucknow: देश की GDP ग्रोथ को लेकर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी GDP विकास दर के सरकारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए मायावती ने कहा कि देश की आम जनता महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में लोगों के सामने सवाल है कि सरकारी आंकड़ों पर भरोसा किया जाए या फिर जमीनी हकीकत को सच माना जाए।

GDP बढ़ी तो गरीबों को कितना फायदा मिला?

बसपा सुप्रीमो ने सवाल उठाया कि अगर देश की अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इस विकास का फायदा करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों को कितना मिला है। उन्होंने कहा कि केवल GDP के आंकड़े बढ़ने से विकास की तस्वीर पूरी नहीं होती। विकास की असली कसौटी यह है कि उसका असर आम आदमी की जिंदगी पर कितना पड़ा। क्या लोगों की आय बढ़ी? क्या बेरोजगारी कम हुई? क्या महंगाई से राहत मिली? और क्या गरीब परिवारों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार आया?

मायावती के मुताबिक, सरकार को विश्वसनीय तरीके से देश की जनता के सामने यह बताना चाहिए कि 7.8 फीसदी की विकास दर का लाभ किस तरह आम लोगों तक पहुंच रहा है और आने वाले समय में इसका फायदा उन्हें कैसे मिलेगा।

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‘जमीनी हकीकत ही विकास की असली कसौटी’

मायावती ने कहा कि विकास के आंकड़े और सरकारी दावे अपनी जगह हैं, लेकिन उनकी वास्तविक परीक्षा जमीन पर होती है। अगर आर्थिक विकास का लाभ समाज के बड़े हिस्से तक नहीं पहुंचता तो ऐसे विकास की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विकास वही माना जाएगा, जिससे आम जनता के जीवन में समतामूलक बदलाव आए और लोग आर्थिक रूप से बेहतर तथा सम्मानजनक जीवन जी सकें।

बसपा प्रमुख ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि GDP के आंकड़ों का फायदा अगर करोड़ों मेहनतकश लोगों तक नहीं पहुंचा और उसका असर उनकी जिंदगी में महसूस नहीं हुआ तो करीब 140 करोड़ की आबादी को ‘धनवान सरकार की गरीब जन

ता’ होने का बोझ ढोते रहना पड़ेगा।

 

‘अच्छे दिन’ की कसौटी पर भी सवाल

मायावती ने विकास और ‘अच्छे दिन’ के दावों को भी आम जनता की स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि देश का विकास तभी वास्तविक मायने में अच्छा माना जाएगा, जब बहुजन और मेहनतकश जनता गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से मुक्त होकर आत्मसम्मान के साथ अपेक्षाकृत सुखी जीवन जी सके। उनका कहना है कि आर्थिक विकास का अंतिम उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़ों को बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना होना चाहिए।

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आउटसोर्स कर्मचारियों के फैसले पर भी साधा निशाना

मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार के आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने और करीब 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर देने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य हो सकता है, लेकिन इससे बेहतर होता कि इन लोगों को सीधे सरकारी नौकरी दी जाती। मायावती के मुताबिक, नियमित सरकारी नौकरी मिलने से कर्मचारियों को अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार और शोषण जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती थी।

GDP के आंकड़ों पर सियासी बहस तेज

मायावती के बयान के बाद GDP ग्रोथ के आंकड़े एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। एक तरफ सरकार आर्थिक विकास की रफ्तार को अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के तौर पर पेश कर सकती है, वहीं विपक्षी दल यह सवाल उठा रहे हैं कि इस विकास का वास्तविक लाभ आम जनता तक कितना पहुंच रहा है।

Location :  Lucknow

Published :  4 September 2026, 7:36 PM IST

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