Mirzapur News: एक साईफन टूटने से कैसे बदल गई गांवों की तस्वीर? पानी में डूबी फसल, अब प्रशासन से उम्मीद

जमालपुर विकासखंड क्षेत्र में हसौली नहर का पुराना साईफन तोड़े जाने के बाद जल निकासी की समस्या गंभीर हो गई है। हसौली, कर्जी समेत आसपास के कई गांवों में जलभराव से कृत्रिम बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। किसानों को कई सौ बीघा खड़ी फसल बर्बाद होने की आशंका है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 4 September 2026, 6:56 PM IST
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Mirzapur: मिर्जापुर के जमालपुर विकासखंड क्षेत्र में हसौली नहर का पुराना साईफन तोड़े जाने के बाद जल निकासी की समस्या गंभीर हो गई है। हसौली, कर्जी समेत आसपास के कई गांवों में जलभराव से कृत्रिम बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। किसानों को कई सौ बीघा खड़ी फसल बर्बाद होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे और स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग की है।

साईफन टूटने से बढ़ी जल निकासी की समस्या

ग्रामीणों के अनुसार, हसौली नहर में कई दशक पहले साईफन का निर्माण कराया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य गड़ई नदी में बाढ़ आने के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी करना था। रामपुर, ओड़ी, भदावल और जमालपुर नहर मार्ग पर हसौली के पास बना यह साईफन क्षेत्र में पानी निकालने का प्रमुख माध्यम माना जाता था।

ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग ने बिना पर्याप्त जांच और वैकल्पिक व्यवस्था किए पुराने साईफन को तोड़ दिया। इसके बाद बाढ़ के समय पानी की निकासी प्रभावित हो गई और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी।

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नहर मार्ग खोदकर निकाला जा रहा पानी

वर्तमान में बाढ़ के पानी की निकासी के लिए रामपुर-जमालपुर नहर मार्ग को खोदकर पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है। पानी का दबाव बढ़ने पर समस्या दोबारा गंभीर हो सकती है।

इसके अलावा नहर के किनारे बने नाले की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कथित अतिक्रमण कर मकान बनाए जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आ रही है और जलभराव की समस्या और बढ़ गई है।

किसानों की खड़ी फसल पर संकट

जलभराव का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जल्द पानी नहीं निकाला गया तो कई सौ बीघा कृषि भूमि की फसल बर्बाद हो सकती है।

किसानों का कहना है कि लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसल को भारी नुकसान होगा। इससे उनकी मेहनत और खेती में लगाया गया पैसा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

पुराने मकानों और सोसायटी पर भी खतरा

जलभराव से सिर्फ खेत ही प्रभावित नहीं हैं, बल्कि गांवों के पुराने और जर्जर मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। लगातार पानी जमा रहने से इन मकानों की नींव कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। हसौली सोसायटी परिसर में भी पानी पहुंच गया है। यहां रखे खाद, बीज, अनाज और अन्य सामान के खराब होने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने समय रहते पानी निकालने और सामग्री को सुरक्षित करने की मांग की है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन से की सर्वे की मांग

कृत्रिम बाढ़ की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह ने प्रशासन से तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल और अन्य नुकसान का सही आकलन कराया जाए। साथ ही प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

ग्रामीणों ने पुराने साईफन जैसी स्थायी जल निकासी व्यवस्था दोबारा तैयार कराने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में बाढ़ के दौरान गांवों और खेतों में जलभराव की समस्या न हो। फिलहाल क्षेत्र में जल निकासी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई और स्थायी समाधान पर टिकी है।

Location :  Mirzapur

Published :  4 September 2026, 6:55 PM IST

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