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रायबरेली: महिला सशक्तिकरण व सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश की पुलिस भले ही लाख दावे करे कि उनके द्वारा महिला थाना व पिंक बूथ जैसी सुविधाएं देकर महिला सुरक्षा का काम किया है। लेकिन जब इन पुलिस पिंक बूथ पर महिला पुलिस कर्मी ही नदारद रहेगी तो फिर महिलाएं व छात्राओं की सुनवाई कौन करेगा?
गौरतलब है कि जनपद में कई जगह पुलिस पिंक बूथ बनाये गए थे। बूथ पर 24 घंटे पुलिस तैनात की गई थी। जिसमे महिला पुलिसकर्मी भी रखी गईं थी। महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बूथ का निर्माण किया गया था। बूथ पर महिलाओं को बैठने के लिए स्थान और शिकायत कक्ष के साथ ही प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा भी उप्लब्ध रहने की बात कही गई थी।
पिंक बूथ पर पुलिसकर्मी दिखाई दी नदारद
रायबरेली शहर की बात की जाए तो लखनऊ प्रयागराज नेशनल हाइवे पर रतापुर चौराहे पर बनाये गए, पुलिस पिंक बूथ पर महिला पुलिस कर्मी नदारद दिखाई दी। इसके बाद से यह कहा जाने लगा कि जब महिलाओं की शिकायत सुनने के लिये महिला पुलिसकर्मी ही नहीं हैं, तो फिर कौन सुनवाई करेगा, क्योंकि बिना झिझक व परेशानी के महिलायें व छात्राएं पुरुष पुलिसकर्मियों से अपनी बात नही कह पातीं। इससे छेड़छाड़ व अन्य अपराध करने वाले लोगों के हौंसले भी बढ़ते हैं।
अमित सिंह ने दी जानकारी
इस मामले में सीओ सिटी अमित सिंह का कहना है कि शहर में कुल 3 पिंक बूथ हैं। इसमें पहला सदर कोतवाली के डिग्री कालेज चौराहे पर, दूसरा भदोखर थाना क्षेत्र के मुंशीगंज और तीसरा मिल एरिया थाना क्षेत्र के रतापुर चौराहे पर है। तीनों पिंक बूथ पर महिला पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की गई है। जो भी महिलाएं समस्या लेकर यहां आती हैं उसे सुना जाता है और उस पर कार्रवाई होती है।
उन्होंने कहा कि रतापुर चौराहे पर महिला पुलिसकर्मी की तैनाती की गई थी। जानकारी मिली कि वह ड्यूटी पर तैनात नहीं है उसे ड्यूटी पर भेज दिया गया है। जो महिलाकर्मी ड्यूटी पर गैर-हाजिर है, इसकी जांच करके आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
Published : 26 November 2024, 6:07 PM IST
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