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टी20 विश्व कप 2026 में टीम इंडिया की जीत के बाद जहां पूरे देश में जश्न मनाया जा रहा है, वहीं पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अपने बयान में उन्होंने ट्रॉफी को धार्मिक स्थलों से जोड़ने पर सवाल उठाए।
कीर्ति आजाद के ट्वीट से शुरू हुआ विवाद
New Delhi: टी20 विश्व कप 2026 में टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत के बाद जहां पूरे देश में जश्न का माहौल था, वहीं सोशल मीडिया पर अचानक ऐसा विवाद खड़ा हो गया जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया। जैसे ही टीम इंडिया ने खिताब जीता, देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन इसी बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर और राजनेता कीर्ति आजाद के एक तीखे सोशल मीडिया पोस्ट ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया।
टी20 विश्व कप 2026 में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त खेल दिखाया और पूरे टूर्नामेंट में टीम का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। इस जीत के बाद देशभर में जश्न मनाया गया। क्रिकेट फैंस सड़कों पर उतर आए, सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई और खिलाड़ियों की तारीफ हर तरफ होने लगी। कई दिग्गज खिलाड़ियों और नेताओं ने भी टीम इंडिया को बधाई दी। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच ही एक ऐसा बयान सामने आया जिसने बहस को नया मोड़ दे दिया।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके पोस्ट में टीम इंडिया और क्रिकेट प्रशासन से जुड़े कुछ नामों का जिक्र करते हुए सवाल उठाए गए। कीर्ति आजाद ने अपने पोस्ट में लिखा कि टीम इंडिया को यह याद रखना चाहिए कि क्रिकेट टीम पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है, न कि किसी एक व्यक्ति या परिवार का। उन्होंने कहा कि जब भारत ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब टीम में अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी थे और वह जीत पूरे देश की जीत थी।
कीर्ति आजाद के पोस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा उस हिस्से की हुई जिसमें उन्होंने क्रिकेट ट्रॉफी को धार्मिक स्थलों से जोड़ने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया भारत के 1.4 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि कुछ खिलाड़ियों ने ट्रॉफी को अपने निजी धार्मिक स्थलों पर नहीं ले जाया, जबकि उन्होंने भी टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी।
कीर्ति आजाद के इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि खेल को धर्म से जोड़ना ठीक नहीं है। वहीं दूसरी तरफ कई यूजर्स ने उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह अनावश्यक विवाद खड़ा करने जैसा है।
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कीर्ति आजाद भारतीय क्रिकेट के जाने-माने नामों में से एक रहे हैं। वह 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा भी रहे थे। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले कीर्ति आजाद अक्सर सोशल मीडिया पर भी विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। यही वजह है कि उनका यह बयान भी काफी तेजी से वायरल हो गया।
हालांकि इस पूरे विवाद के बीच टीम इंडिया की जीत का जश्न अभी भी देशभर में जारी है। क्रिकेट प्रेमी खिलाड़ियों की शानदार उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं और इस जीत को भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेल की जीत हमेशा पूरे देश की होती है और ऐसे समय में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए।