नाग पंचमी पर बुंदेलखंड की अनोखी परंपरा: आखिर क्यों पीटी जाती है गुड़िया? वजह जानेंगे तो समझ आएगा इस अनोखी रस्म का पूरा राज

नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि इसी दिन कुछ इलाकों में कपड़े की गुड़िया को डंडे से पीटने की रस्म भी निभाई जाती है? आखिर इस अजीब लगने वाली परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और इसका सांपों से क्या संबंध है?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 17 August 2026, 3:44 PM IST
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Hamirpur: सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी यानी 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन देशभर में नाग देवता की पूजा की जाती है। दूध, फूल और धूप अर्पित कर सुख-समृद्धि और सर्प भय से मुक्ति की कामना की जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में इसी दिन एक ऐसी रस्म भी निभाई जाती है, जिसे पहली बार सुनने पर शायद आपको यकीन न हो। यहां कपड़े की बनी गुड़िया को डंडे से पीटा जाता है।

हमीरपुर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा त्योहार

हमीरपुर नाग पंचमी के पावन अवसर पर आज जनपद हमीरपुर के मेरापुर स्थित प्रसिद्ध संगमेश्वर मंदिर के पास बुंदेलखंड की एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा देखने को मिली। यहां बड़ी संख्या में क्षेत्र की युवतियों और महिलाओं ने कपड़े से सुंदर गुड़िया बनाकर उसे पारंपरिक विधि से कूटा और फिर यमुना नदी में प्रवाहित किया। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी युवा पीढ़ी उतने ही उत्साह और आस्था के साथ निभा रही है।

गुड़िया पीटने की रस्म के लिए पहुंची युवतियां (Img: Dynamite News)

नाग पंचमी पर गुड़िया को क्यों पीटते हैं?

गुड़िया पीटने की परंपरा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र, की लोकपरंपराओं में बताई जाती है। इस रस्म में महिलाएं या लड़कियां कपड़े से एक गुड़िया तैयार करती हैं। इसके बाद पुरुष या बच्चे प्रतीकात्मक रूप से उसे डंडे से पीटते हैं। हालांकि, इसका संबंध नाग देवता की पूजा से सीधे तौर पर किसी एक सार्वभौमिक धार्मिक ग्रंथ में नहीं मिलता। इसे स्थानीय मान्यता और लोककथा से जुड़ी परंपरा माना जाता है। इस रस्म के पीछे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कहानियां सुनाई जाती हैं।

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गुड़िया पीटने के पीछे क्या है प्राचीन कथा?

एक लोकप्रिय लोककथा के अनुसार, एक लड़का भगवान शिव का बड़ा भक्त था। वह रोज शिव मंदिर जाता और पूरी श्रद्धा से पूजा करता था। मंदिर के पास रहने वाला एक सांप उसकी भक्ति से प्रभावित था। वह अक्सर लड़के के पास आता और उसके पैर से लिपट जाता। एक दिन लड़का अपनी बहन के साथ मंदिर पहुंचा। वहां वही सांप आकर उसके पैर से लिपट गया। सांप को देखते ही बहन घबरा गई। उसे लगा कि सांप उसके भाई को नुकसान पहुंचा सकता है। भाई कुछ समझ पाता, उससे पहले ही बहन ने पास पड़ी लकड़ी से सांप पर हमला कर दिया। इस हमले में सांप की मौत हो गई।

हमीरपुर में रस्म के लिए बनाई गई कपड़े की गुड़िया (Img: Dynamite News)

लोककथा के अनुसार, जब गांव वालों को इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे सांप के साथ हुए अन्याय के रूप में देखा। लेकिन यह गलती जानबूझकर नहीं हुई थी। ऐसे में बच्ची को दंड देने के बजाय कपड़े की एक गुड़िया बनाई गई। इसके बाद गुड़िया को सांकेतिक रूप से डंडे से पीटा गया। माना जाता है कि इसी घटना की याद में कुछ जगहों पर नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की रस्म निभाई जाने लगी। समय के साथ इस परंपरा को बुराई, अहंकार या पुराने दोष के प्रतीकात्मक अंत से भी जोड़ा गया। कुछ जगह इसे नाग देवता को प्रसन्न करने और परिवार की रक्षा की कामना से जुड़ी रस्म माना जाता है।

तक्षक नाग और राजा परीक्षित से भी जुड़ी एक कथा

गुड़िया पीटने की परंपरा को लेकर एक दूसरी लोककथा भी सुनने को मिलती है। इसमें इसका संबंध तक्षक नाग और राजा परीक्षित की कथा से जोड़ा जाता है। अलग-अलग इलाकों में इस कहानी के विवरण अलग-अलग मिलते हैं। इसी वजह से किसी एक कथा को इस परंपरा की निश्चित शुरुआत मानना सही नहीं होगा। ये कथाएं मुख्य रूप से स्थानीय लोकविश्वास और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का हिस्सा हैं।

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हर जगह नहीं निभाई जाती यह रस्म

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व मुख्य रूप से नाग देवता की पूजा से जुड़ा है। गुड़िया पीटना नाग पंचमी का अनिवार्य या पूरे देश में प्रचलित शास्त्रीय अनुष्ठान नहीं है। यह कुछ क्षेत्रों की स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा है। कहीं गुड़िया को चौराहे पर रखने की परंपरा बताई जाती है तो कहीं भाई द्वारा उसे पीटने और बाद में जलाशय के पास ले जाने की रस्म का उल्लेख मिलता है।

Location :  Hamirpur

Published :  17 August 2026, 3:44 PM IST

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