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घर की ऊर्जा का जीवन पर प्रभाव (Img- Pinterest)
New Delhi: वास्तु शास्त्र में घर के प्रत्येक प्रवेश द्वार और दिशा का व्यक्ति की मानसिक स्थिति, मान-सम्मान और आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रसिद्ध इंटीरियर वास्तु प्लानर और कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल अपनी विशेष '32 प्रवेश द्वार सीरीज़' के माध्यम से लगातार लोगों को सही वास्तु ज्ञान से रूबरू करा रही हैं।
इसी कड़ी में आज उन्होंने घर की दो बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील दिशाओं असुर और पाप्यक्षमा के नकारात्मक प्रभावों और उनके निवारण पर प्रकाश डाला है।
रानी टिबड़ेवाल के अनुसार, घर की वेस्ट-नॉर्थ (पश्चिम-उत्तर) दिशा को वास्तु में 'असुर' का स्थान माना गया है। यह दिशा स्वभाव से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती है।
यदि घर का मुख्य द्वार या कोई मुख्य हिस्सा इस दिशा में आता है, तो घर के सदस्यों को बेवजह का मानसिक तनाव, अवसाद (Depression) और सामाजिक मान-सम्मान में कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस दोष से बचाव के लिए उन्होंने इस दिशा में 'काली यंत्र' स्थापित करने की सलाह दी है, जो नकारात्मक शक्तियों को निष्प्रभावी करता है।
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सीरीज़ के अगले चरण में 'पाप्यक्षमा' दिशा के बारे में बताया गया है, जो वेस्ट-नॉर्थ-वेस्ट (WNN) क्षेत्र में स्थित होती है। इस दिशा का वास्तु असंतुलित होने पर व्यक्ति अपने तात्कालिक लाभ या स्वार्थ के लिए गलत और अनैतिक रास्तों को अपनाने लगता है।
यह प्रवृत्ति भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकती है। रानी टिबड़ेवाल के अनुसार, इस नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करने और मन में शुद्धता लाने के लिए इस स्थान पर 'भुवनेश्वरी यंत्र' की स्थापना करनी चाहिए।
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यदि आपको अपने घर की सटीक दिशाएं समझने में कोई भ्रम है, तो रानी टिबड़ेवाल ने इसके लिए पहले से ही एक विस्तृत गाइड वीडियो साझा किया है, जिसका लिंक कमेंट बॉक्स में उपलब्ध कराया गया है। सही दिशा की पहचान करके और बताए गए यंत्रों की स्थापना से आप अपने घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त कर खुशहाली ला सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 19 August 2026, 2:41 PM IST
Topics : positive energy Vastu For Home Vastu Tips