हिंदी
अजन्मी बेटियों के लिए महिलाओं ने किया तर्पण (IMG: Dynamite News)
Kanpur News: कानपुर के सरसैया घाट पर रविवार को एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने समाज में बेटियों के अस्तित्व और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। गंगा किनारे 40 से ज्यादा महिलाओं ने उन अजन्मी बेटियों की याद में तर्पण किया, जिन्हें दुनिया में आने से पहले ही गर्भ में मार दिया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महिलाओं ने विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया और बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने का संकल्प लिया। युग दधीचि देहदान संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या और पुत्र मोह जैसी सामाजिक सोच के खिलाफ जागरूकता फैलाना था।
सरसैया घाट पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। यहां अजन्मी बेटियों को याद करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई। महिलाओं ने विधि-विधान के साथ तर्पण और पिंडदान कर उन बच्चियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की, जिन्हें कथित तौर पर पुत्र की चाह में जन्म लेने का अवसर नहीं मिल पाया।
आयोजन में शामिल महिलाओं ने बेटियों के प्रति भेदभाव खत्म करने और उन्हें समान अधिकार व सम्मान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बेटी का जन्म किसी परिवार के लिए बोझ नहीं, बल्कि समाज के भविष्य का हिस्सा है। महिलाओं ने अजन्मी बेटियों को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की और समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने की अपील की।
युग दधीचि देहदान संस्था के अध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक मनोज सेंगर पिछले करीब 16 वर्षों से इस तरह के आयोजन करते आ रहे हैं। संस्था की ओर से इस कार्यक्रम को सामाजिक जागरूकता से जोड़कर देखा जाता है। मनोज सेंगर के मुताबिक, इस आयोजन के जरिए समाज के सामने यह सवाल रखने की कोशिश की जाती है कि आखिर उन बच्चियों का क्या, जिन्हें जन्म लेने से पहले ही दुनिया से विदा कर दिया गया। उनका कहना है कि पुत्र मोह के कारण गर्भ में बेटियों को खत्म करने जैसी सोच में बदलाव जरूरी है।
कचरे के ढेर से जगमगाएंगे शहर और गांव, कानपुर के HBTU की इस अनोखी तकनीक ने बदल दी तस्वीर
कार्यक्रम में वक्ताओं और आयोजकों की ओर से पुत्र मोह को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। समाज में लंबे समय से चली आ रही उस सोच पर सवाल उठाया गया, जिसमें परिवार के लिए बेटे को जरूरी और बेटी को कमतर माना जाता है। आयोजकों ने कहा कि बेटियों के अधिकार और सम्मान को लेकर समाज की सोच बदलने की जरूरत है। किसी बच्चे का लिंग उसके अधिकार या सम्मान का आधार नहीं होना चाहिए। बेटियों को भी बेटे के समान शिक्षा, अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने समाज से अपील की कि बेटियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। बेटियों को शिक्षा से लेकर रोजगार और जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। आयोजन के दौरान यह भी संदेश दिया गया कि केवल कानून बनाने से सामाजिक सोच नहीं बदलती। इसके लिए परिवार और समाज के स्तर पर भी बदलाव जरूरी है। जब बेटियों को बेटे के बराबर समझा जाएगा, तभी भेदभाव की मानसिकता कमजोर होगी।
Location : Kanpur
Published : 5 October 2026, 12:22 PM IST