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घर की वेस्ट दिशा में छिपा है समृद्धि का राज (Img- AI)
New Delhi: वास्तु शास्त्र में हर दिशा का अपना एक विशेष महत्व और ऊर्जा होती है। अक्सर लोग केवल चार मुख्य दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) के बारे में ही जानते हैं, लेकिन इनके भीतर छिपी उप-दिशाएं हमारे जीवन पर गहरा असर डालती हैं।
पश्चिम (West) दिशा के क्षेत्र में आने वाली तीन प्रमुख उप-दिशाएं टौवारिक, सुग्रीव और पुष्पदंत। हमारे रिश्तों, आर्थिक स्थिति और बच्चों के भविष्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। आइए जानते हैं कि इन दिशाओं का क्या प्रभाव होता है और इन्हें कैसे संतुलित किया जा सकता है।
पश्चिम दिशा के अंतर्गत आने वाली 'टौवारिक' दिशा नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है। यदि घर का यह हिस्सा असंतुलित हो, तो करीबियों और अपनों के साथ संबंधों में अविश्वास पनपने लगता है। इसके साथ ही घर में बेवजह के खर्चे बढ़ते हैं और धन की बचत नहीं हो पाती। इस दिशा के वास्तु दोष को दूर करने के लिए घर में भैरव यंत्र की स्थापना करना बेहद लाभदायी माना गया है।
पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम (WSW) क्षेत्र में स्थित 'सुग्रीव' दिशा अत्यंत शुभ और सकारात्मक फल देने वाली मानी जाती है। यह दिशा जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। साथ ही, धन में वृद्धि और घर में सुख-समृद्धि लाती है। सुग्रीव दिशा की शुभ ऊर्जा को और बढ़ाने और इसे हमेशा बनाए रखने के लिए घर में सरस्वती यंत्र स्थापित करने की सलाह दी जाती है।
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सुग्रीव दिशा की तरह ही 'पुष्पदंत' दिशा भी जीवन में बेहद सकारात्मक परिणाम देती है। यह दिशा विशेष रूप से घर के बच्चों और युवाओं की प्रगति, समृद्धि और सही मानसिक व शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार होती है। बच्चों के बेहतर भविष्य और सर्वांगीण विकास के लिए इस दिशा में त्रिपुर भैरवी यंत्र की स्थापना करनी चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
Location : New Delhi
Published : 10 August 2026, 11:53 AM IST