Pitru Paksha में शाम का दीया चमकाएगा किस्मत, इस दिशा में जलाने से बरसेगी पितरों की असीम कृपा

पितृ पक्ष में शाम के समय पितरों के लिए दीपक जलाने का विशेष महत्व है। दक्षिण दिशा में तेल का दीया जलाने और मुख्य द्वार या पीपल के पेड़ के पास प्रकाश करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, जिससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Updated : 27 September 2026, 12:46 PM IST
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New Delhi: पितृ पक्ष का समय हमारे पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। इस दौरान पिंडदान और तर्पण के साथ-साथ संध्याकाल में दीपक जलाने की परंपरा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम के वक्त जलाया गया यह दीपक न केवल पितरों के मार्ग को रोशन करता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का संचार भी करता है।

पितरों के लिए शाम को दीपक जलाने का महत्व

सनातन संस्कृति में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना बेहद पुण्यदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि शाम के समय दीपक प्रज्वलित करके पितरों के प्रति सम्मान और अपनी भावनाएं व्यक्त की जाती हैं। यह दीया इस बात का प्रतीक है कि परिवार आज भी अपने पूर्वजों को भूला नहीं है। इसके प्रकाश से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और पितर प्रसन्न होकर अपने परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

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किस दिशा में और क्यों जलाएं पितृ दीप?

हिंदू धर्म शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना गया है। यही कारण है कि पितरों के निमित्त जलाए जाने वाले दीपक का संबंध इसी दिशा से जोड़ा जाता है।

दिशा और अनुभव: शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके या उसी दिशा में दीपक रखने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। इससे पितरों को यह अहसास होता है कि उनके अपने इस विशेष काल में उनकी राह देख रहे हैं और उन्हें याद कर रहे हैं।

लौ की सही स्थिति: दीपक जलाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसकी लौ दक्षिण दिशा की ओर ही रहे। पूजा में तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाना श्रेष्ठ माना गया है। दीपक जलाते समय पूरी श्रद्धा से पूर्वजों का ध्यान करना चाहिए।

घर के मुख्य द्वार पर दीपक रखने की परंपरा

पितृ पक्ष की संध्या बेला में घर के मुख्य द्वार के बाहर पितरों के लिए दीया जलाने की प्राचीन रीति है। इसके पीछे एक सुंदर लोकमान्य मान्यता यह भी है कि मुख्य द्वार पर प्रकाश रहने से घर के रास्ते में पितरों को अंधकार नहीं दिखाई देता और वे सहजता से अपने परिजनों के पास पहुंच पाते हैं। मुख्य द्वार पर दीया रखते समय उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखें और लौ की दिशा दक्षिण की तरफ ही रखें।

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पीपल, तुलसी और पानी के स्थान पर दीपक जलाने के अन्य नियम

मुख्य द्वार के अलावा पितृ पक्ष में कुछ अन्य पवित्र स्थानों पर भी दीपक प्रज्वलित करने का विधान है-

पीपल का पेड़: यदि आपके घर के आसपास पीपल का वृक्ष है, तो शाम के समय वहां दीया जलाकर पितरों का स्मरण करना बहुत शुभ फल देता है।

तुलसी और जल का स्थान: इसके अलावा, घर में तुलसी के पौधे के पास या पीने का पानी रखने के स्थान (जैसे मटके या प्याऊ के पास) पर भी पितरों के निमित्त दीपक प्रज्वलित करने की परंपरा हमारे समाज में चली आ रही है।

Disclaimer: यह आलेख धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित सामान्य जानकारी के लिए है। डाइनामाइट न्यूज़ इस लेख में लिखी बातों की पुष्टि नहीं करता है।

Location :  New Delhi

Published :  27 September 2026, 12:46 PM IST

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