Ganesh Chaturthi 2026: आज घर आएंगे विघ्नहर्ता! स्वागत में भूलकर भी न रखें ये गलतियां, जानें पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त और नियम

गणेश चतुर्थी 2026 पर बप्पा को घर में विराजमान करने से पहले जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और वास्तु नियम। तुलसी, चमड़े की वस्तुओं और सफाई से जुड़ी इन 5 बड़ी गलतियों से बचें ताकि घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का आगमन हो सके।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 14 September 2026, 8:19 AM IST
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New Delhi: आज गणेश चतुर्थी का पावन पर्व देशभर में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आज से अगले 10 दिनों तक भगवान श्री गणेश हमारे घरों में विराजमान रहकर सुख, समृद्धि और रिद्धि-सिद्धि का आशीर्वाद देंगे। यह त्योहार सिर्फ पूजा-अर्चना का माध्यम नहीं है, बल्कि परिवारों में मिठास, प्रेम और खुशियां बांटने का एक पवित्र अवसर भी है। अगर आप भी अपने घर में बप्पा की स्थापना करने जा रहे हैं, तो पूजा की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ खास बातों और नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

स्थापना के लिए मिलेगा केवल 2 घंटे 29 मिनट का शुभ मुहूर्त

गणेश स्थापना के लिए इस साल पूजा का सबसे उत्तम समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। यानी भक्तों के पास बप्पा की प्रतिमा स्थापित करने के लिए कुल 2 घंटे 29 मिनट की अवधि होगी। शुभ मुहूर्त की समय-सीमा को देखते हुए पूजा सामग्री, चौकी, फूल और मोदक का भोग पहले से तैयार रखें, ताकि अंतिम समय में किसी हड़बड़ी के बिना शांत भाव से पूजा संपन्न की जा सके।

भूलकर भी पूजा में न करें तुलसी का इस्तेमाल

गणपति बाप्पा की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना पूरी तरह वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए भोग, जल या पूजा की थाली में तुलसी की जगह दूर्वा (हरी घास) का प्रयोग करें। गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है और इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

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पूजा स्थल की स्वच्छता और वास्तु नियमों का रखें ध्यान

बप्पा को जिस स्थान पर स्थापित कर रहे हैं, वहां का माहौल पूरी तरह स्वच्छ और सकारात्मक होना चाहिए। मंदिर या पूजा स्थल के पास गंदगी, पुराना बिखरा सामान या डस्टबिन (कूड़ादान) रखने की भूल न करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल के पास डस्टबिन होने से घर की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे पूजा का शुभ प्रभाव कम हो सकता है।

चमड़े की वस्तुओं और जूते-चप्पल से बनाएं दूरी

धार्मिक अनुष्ठानों में चमड़े से बनी वस्तुओं को अशुद्ध माना जाता है। पूजा के दौरान पर्स, बेल्ट, घड़ी के लेदर स्ट्रैप जैसी चीजें पहनकर न बैठें और न ही इन्हें पूजा स्थल के आसपास रखें। इसके अलावा, जूते-चप्पल को भी मंदिर के मुख्य स्थान से दूर रखें ताकि स्थान की शुचिता बनी रहे।

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पूजा सामग्री और स्थापना की सही विधि

गणपति की स्थापना के लिए एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। प्रतिमा स्थापित करने के बाद रोली, चंदन और अक्षत से तिलक करें। इसके बाद दूर्वा, ताजे फूल और धूप-दीप जलाएं। कलश और नारियल की स्थापना के साथ बप्पा को उनके प्रिय मोदक, मोतीचूर के लड्डू और मौसमी फलों का भोग लगाएं। अंत में पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती करें और विघ्नहर्ता से घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें।

Location :  New Delhi

Published :  14 September 2026, 8:19 AM IST

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