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वायरल भजन की पौराणिक कथा (Img- X)
New Delhi: सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक बुंदेली भजन जबरदस्त धूम मचा रहा है। फिल्म हनुमान अंश का गाना 'जब जिद पर आ गई पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि' साधु तिवारी की आवाज में हर दूसरी रील और शॉर्ट वीडियो की बैकग्राउंड धुन बन चुका है।
लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर करने वाला यह भजन सिर्फ एक लोकगीत नहीं, बल्कि प्रेम, दृढ़ संकल्प और आस्था की एक अद्भुत पौराणिक गाथा को बयां करता है।
शिव महापुराण और रामचरितमानस के बालकांड के अनुसार, सती के देह त्याग के बाद जब उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया, तो महर्षि नारद ने उन्हें उनके पूर्व जन्म के लक्ष्य की याद दिलाई।
इसके बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पुन: पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने हवा और पत्ते खाकर तप किया और अंत में अन्न-जल का पूरी तरह त्याग कर दिया, जिससे देवलोक में खलबली मच गई।
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पार्वती का संकल्प कितना मजबूत है, यह परखने के लिए स्वयं भगवान शिव के कहने पर सप्तऋषि (वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज) उनकी कुटिया पहुंचे।
ऋषियों ने पार्वती का मन बदलने के लिए शिव की वेशभूषा, श्मशानवास, शरीर पर भस्म और गले में लिपटे सांपों का हवाला देते हुए शिव का तपस्वी जीवन बयां किया। उन्होंने तर्क दिया कि कैलाश पर न कोई महल है और न ही सुख-सुविधाएं।
सप्तऋषियों के तमाम तर्कों के बावजूद माता पार्वती का इरादा नहीं डगमगाया। उन्होंने विनम्रता से कहा कि वे मन, वचन और कर्म से शिव को अपना स्वामी स्वीकार कर चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे करोड़ों जन्म क्यों न लेने पड़ें, वे शिव के अलावा किसी अन्य का वरण नहीं करेंगी।
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पार्वती की इस अखंड जिद और निश्चल भक्ति को देखकर सप्तऋषि नतमस्तक हो गए। आखिरकार भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
Location : New Delhi
Published : 11 September 2026, 12:00 PM IST