पितरों का गुस्सा पल भर में होगा शांत: भाद्रपद अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां

11 सितंबर 2026 को भाद्रपद अमावस्या है। यह दिन पितरों की नाराजगी दूर करने और पितृ दोष से मुक्ति पाने का सबसे उत्तम अवसर है। जानिए इस दिन तर्पण और दान का सही तरीका और किन गलतियों से बचना जरूरी है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 8 September 2026, 3:38 PM IST
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New Delhi: सनातन परंपरा में भाद्रपद माह की अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस साल यह पावन तिथि 11 सितंबर 2026 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों (पितरों) के प्रति आभार व्यक्त करने और जाने-अनजाने में हुई गलतियों की क्षमा मांगने का अवसर होता है। यदि जीवन में बार-बार रुकावटें आ रही हों, तो यह दिन पितृ दोष से राहत पाने का सबसे अचूक मौका माना जाता है।

पितृ दोष के संकेत और अमावस्या का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य, राहु और केतु की विशेष स्थितियों के कारण कुंडली में पितृ दोष बनता है। जब परिवार में तरक्की रुक जाए, आर्थिक तंगी बनी रहे, या पारिवारिक कलेश खत्म न हो, तो इसे पितरों की नाराजगी से जोड़कर देखा जाता है। भाद्रपद अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण और दान इन सभी समस्याओं को दूर कर घर में सुख-समृद्धि लाता है।

तर्पण और दान की सही विधि

इस दिन सुबह स्नान के बाद जल, काले तिल और कुश हाथ में लेकर पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए। इसके साथ ही 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र का जाप करते हुए पूर्वजों का स्मरण करें। पूजा के बाद अपने सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्न का दान करें। इस दिन घर की छत या चौखट पर गाय, कौवे और कुत्ते के लिए भोजन का अंश निकालना न भूलें।

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अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये गलतियां

भाद्रपद अमावस्या के दिन दिखावे के लिए पूजा करने से बचें, क्योंकि पितृ केवल सच्चे भाव के भूखे होते हैं। इस दिन घर में कलह, क्रोध, झूठ बोलने या किसी असहाय व्यक्ति का अपमान करने से बचें। द्वार पर आए किसी भी जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं, क्योंकि ऐसा करने से पितृ नाराज हो सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  8 September 2026, 3:38 PM IST

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