अमेरिका की धरती पर RSS प्रमुख बाेले: विविधता में एकता भारत का DNA, अमेरिकी भारतीयों को दिया खास मंत्र

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि एकता और विविधता भारत के डीएनए में बसी है। 30 देशों के प्रतिनिधियों के सामने उन्होंने प्रवासी भारतीयों से कर्मभूमि के प्रति वफादार रहने और भारतीय मूल्यों को सहेजने की अपील की।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 August 2026, 9:27 AM IST
google-preferred

New Delhi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत न्यूयॉर्क का मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन एक ऐतिहासिक विचार-मंथन का गवाह बना। 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' में 30 से अधिक देशों के 180 धार्मिक गुरु और 5,000 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी शामिल हुए। इस मंच से संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया को भारत की सांस्कृतिक ताकत और जीवन दर्शन का एक नया और गहरा संदेश दिया।

भारत का डीएनए: पहनावा और भाषा अलग, पर अंतरात्मा एक

संघ प्रमुख ने पश्चिमी देशों के 'बहुलतावाद' और भारत की 'विविधता में एकता' के बीच का फर्क साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत में लोगों का खान-पान, भाषा, पहनावा और पूजा का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सभी के बीच एक दिल से जुड़ा गहरा रिश्ता है।

एकता और विविधता भारत के डीएनए में बसी है। स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की नियति पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने और इस एकता का अहसास कराने की है।

धर्म से ऊपर इंसानियत: अलग रास्तों की एक ही मंजिल

मोहन भागवत ने धर्म की परिभाषा को पूजा-पाठ से आगे ले जाते हुए इसे पूरी सृष्टि को संभालने वाली व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक रास्ते भले ही भिन्न दिखें, पर वे सभी एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और यही विचार पूरी मानव जाति को जोड़कर रख सकता है।

खरगे के मंच का शुद्धिकरण… राहुल गांधी ने खोला मोर्चा, BJP-RSS पर लगाया बड़ा आरोप, FIR की मांग

प्रवासी भारतीयों को मंत्र: कर्मभूमि से वफादारी, जन्मभूमि के संस्कार

अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय को सीख देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि वे अपनी कर्मभूमि अमेरिका के नियमों और अनुशासन का पूरी निष्ठा से पालन करें। हालांकि, इसके साथ ही उन्हें अपनी जन्मभूमि भारत की संस्कृति और संस्कारों को भी संजोकर रखना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि इंसान की असली पहचान इस बात से नहीं होती कि वह कितना कमाता है, बल्कि इस बात से होती है कि वह समाज को वापस कितना लौटाता है।

Location :  New Delhi

Published :  30 August 2026, 9:27 AM IST

Related News

Advertisement