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नेपाल में कुदरत का कहर (Img- X)
Kathmandu: तिब्बत सीमा के पास अचानक ग्लेशियर टूटने से उठी तबाही की लहरों ने मध्य नेपाल को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है। बर्फ, चट्टानों और कीचड़ के इस खौफनाक बहाव ने हंसते-खेलते गांवों और शहरों को श्मशान में बदल दिया। इस भयानक आपदा में अब तक 675 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। संकट तब और बढ़ गया जब मौसम विभाग ने प्रभावित आठों जिलों में फिर से तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया, जिससे रेस्क्यू टीमों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में बचाव दल मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। अब तक करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश और जगह-जगह जमी कीचड़ के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं। बाढ़ में कई जलविद्युत परियोजनाएं और बुनियादी ढांचे पूरी तरह बह गए हैं।
भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 275 भारतीय अभी भी लापता हैं।
चीन के रास्ते नेपाल पहुंचे 598 भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं, वहीं 900 अन्य भारतीय नागरिक दूतावास के सीधे संपर्क में हैं। नागपुर लौटे पर्यटकों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मदद से सुरक्षित वतन वापसी पर राहत की सांस ली।
मुश्किल की इस घड़ी में भारत ने अपने पड़ोसी देश की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि 11 टन राहत सामग्री की चौथी खेप काठमांडू पहुंच चुकी है, जिससे कुल मदद 68.5 टन हो गई है। इसमें दवाएं, जनरेटर, राशन और पानी साफ करने की गोलियां शामिल हैं। टूटे रास्तों को दोबारा जोड़ने के लिए 230 फीट लंबे स्टील ब्रिज और बेली ब्रिज के उपकरण 16 ट्रकों के जरिए भेजे गए हैं, ताकि राहत कार्य तेजी से हो सके।
Location : Kathmandu
Published : 30 August 2026, 8:36 AM IST