नेपाल में जलप्रलय: 675 मौतों के बाद फिर मंडराया बारिश का खतरा, जानिए रेस्क्यू का हर अपडेट

नेपाल में अचानक आई बाढ़ और जलप्रलय से अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2400 से ज्यादा लोग लापता हैं। मौसम विभाग ने फिर बारिश की चेतावनी दी है। भारत सरकार ने 108 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है और राहत सामग्री की चौथी खेप भी भेजी है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 August 2026, 8:36 AM IST
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Kathmandu: तिब्बत सीमा के पास अचानक ग्लेशियर टूटने से उठी तबाही की लहरों ने मध्य नेपाल को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है। बर्फ, चट्टानों और कीचड़ के इस खौफनाक बहाव ने हंसते-खेलते गांवों और शहरों को श्मशान में बदल दिया। इस भयानक आपदा में अब तक 675 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। संकट तब और बढ़ गया जब मौसम विभाग ने प्रभावित आठों जिलों में फिर से तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया, जिससे रेस्क्यू टीमों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य, 2500 लोग सुरक्षित निकाले गए

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में बचाव दल मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। अब तक करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश और जगह-जगह जमी कीचड़ के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं। बाढ़ में कई जलविद्युत परियोजनाएं और बुनियादी ढांचे पूरी तरह बह गए हैं।

नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए भारत बना 'संरक्षक', 108 लोग रेस्क्यू

भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 275 भारतीय अभी भी लापता हैं।

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चीन के रास्ते नेपाल पहुंचे 598 भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं, वहीं 900 अन्य भारतीय नागरिक दूतावास के सीधे संपर्क में हैं। नागपुर लौटे पर्यटकों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मदद से सुरक्षित वतन वापसी पर राहत की सांस ली।

भारत ने भेजी 68.5 टन राहत सामग्री और पुल बनाने के उपकरण

मुश्किल की इस घड़ी में भारत ने अपने पड़ोसी देश की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि 11 टन राहत सामग्री की चौथी खेप काठमांडू पहुंच चुकी है, जिससे कुल मदद 68.5 टन हो गई है। इसमें दवाएं, जनरेटर, राशन और पानी साफ करने की गोलियां शामिल हैं। टूटे रास्तों को दोबारा जोड़ने के लिए 230 फीट लंबे स्टील ब्रिज और बेली ब्रिज के उपकरण 16 ट्रकों के जरिए भेजे गए हैं, ताकि राहत कार्य तेजी से हो सके।

Location :  Kathmandu

Published :  30 August 2026, 8:36 AM IST

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