Nepal Flood: जहां कभी बाजार की रौनक थी, वहां अब सिर्फ मलबा; नेपाल बाढ़ ने उजाड़ दी हजारों जिंदगियां

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नुवाकोट और गल्छी बाजार की तस्वीर बदल दी। जिन गलियों में कभी बाजार की चहल-पहल और घरों में खुशियां थीं, वहां अब कीचड़, मलबा और टूटे सपने नजर आ रहे हैं। कई परिवारों ने अपना सब कुछ खो दिया, जबकि कुछ लोग अब भी लापता अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 30 August 2026, 8:50 AM IST
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New Delhi: नेपाल-तिब्बत सीमा से करीब 45 किलोमीटर दूर नुवाकोट और इसके आगे स्थित गल्छी बाजार कभी लोगों की आवाजाही और कारोबार के लिए जाना जाता था। आसपास के इलाके में पर्यटन गतिविधियां भी होती थीं। लेकिन 26 अगस्त की बाढ़ ने कुछ ही घंटों में इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी।

बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं लाया, बल्कि लोगों की वर्षों की मेहनत भी बहा ले गया। कहीं दुकानें पूरी तरह गायब हो गईं तो कहीं मकानों के अंदर कई फीट तक कीचड़ जमा हो गया। सड़क और गलियों में टूटे सामान बिखरे हैं। लोग मलबे के बीच अपने जरूरी सामान और कागजात खोज रहे हैं। पानी उतर चुका है, लेकिन लोगों के मन में बाढ़ का डर और अपनों को खोने का दर्द अभी भी बना हुआ है।

कुछ समझ पाते, उससे पहले घरों में घुस गया पानी

गल्छी बाजार निवासी कृष्ण प्रसाद अधिकारी बाढ़ की घटना बताते हुए भावुक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त की सुबह करीब सवा दस बजे अचानक नदी का पानी तेजी से बढ़ने लगा। शुरुआत में लोगों को लगा कि पानी सामान्य स्तर तक ही रहेगा, लेकिन कुछ ही देर में बहाव बेहद तेज हो गया।

लोगों को संभलने और जरूरी सामान निकालने तक का समय नहीं मिला। पानी तेजी से दुकानों और घरों में घुस गया। कृष्ण प्रसाद ने बताया कि किसी तरह परिवार के लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन दुकान का पूरा सामान बह गया। घर के अंदर अनाज, कपड़े, बर्तन और रोजमर्रा का सामान मलबे में दब गया। उनका कहना है कि गांव के करीब पांच लोग अभी भी लापता हैं। परिवारों को यह तक पता नहीं कि वे जिंदा हैं या बाढ़ की तेज धारा उन्हें अपने साथ बहा ले गई।

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कर्ज लेकर भरी थी दुकान

गल्छी बाजार के ही विकास श्रेष्ठ के लिए यह बाढ़ सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत के खत्म होने की कहानी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर दुकान में सामान भरा था। दुकान चलाकर परिवार का खर्च निकालने की उम्मीद थी।

लेकिन बाढ़ के दौरान उनकी आंखों के सामने पूरी जमा पूंजी पानी में बह गई। वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। विकास ने बताया कि उन्होंने पड़ोस के एक युवक को भी पानी की तेज धारा में बहते देखा, लेकिन बहाव इतना खतरनाक था कि उसकी मदद के लिए आगे बढ़ना संभव नहीं था। यह घटना याद करते ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत को इस तरह बर्बाद होते देखना उनके लिए बेहद दर्दनाक था।

घर बचे तो भी रहने लायक नहीं रहे

नुवाकोट में बाढ़ ने हजारों लोगों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, अब जिंदगी दोबारा कैसे शुरू होगी? कई घरों की दीवारें तो खड़ी हैं, लेकिन अंदर की हालत रहने लायक नहीं है। कमरों में कीचड़ और मलबा जमा है। चारपाइयां टूटी पड़ी हैं। बर्तन, कपड़े, बच्चों की किताबें और जरूरी सामान मिट्टी में दबे हुए हैं।

सुदर्शन मलबे के बीच अपने घर को देखते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। जिस घर को परिवार ने वर्षों की कमाई से बनाया था, वह अब पहचान में नहीं आ रहा। बच्चों के कपड़े और किताबों से लेकर घर की जरूरत का सामान तक बाढ़ में बर्बाद हो चुका है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद लोग मलबा हटाने में जुट गए हैं, लेकिन हर तरफ एक ही चिंता है कि रहने के लिए घर और परिवार चलाने के लिए पैसा कहां से आएगा?

अपनों को खोने का दर्द

गल्छी बाजार में करीब 70 परिवारों की बस्ती भी इस आपदा से प्रभावित हुई है। यहां लोगों के सामने दोहरी परेशानी है। एक तरफ घर और रोजगार खत्म हो गया, दूसरी तरफ कुछ परिवार अपने लापता परिजनों का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय निवासी राखू बताते हैं कि बाढ़ के दौरान उनका भतीजा घर का सामान बचाने के लिए अंदर चला गया था। परिवार ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने कहा कि कम से कम कुछ जरूरी सामान तो निकाल लें।

इसी दौरान पानी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया और वह सामान के साथ पानी में बह गया। परिवार को अब तक उसका कोई पता नहीं चला है। राखू कहते हैं कि अगर उसकी मौत हो चुकी है तो कम से कम शव मिल जाए, ताकि परिवार हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार कर सके। 

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पानी कम हुआ, लेकिन मुसीबतें बाकी

शनिवार को त्रिशूली नदी का बहाव कुछ कम हुआ तो कई परिवार अपने घरों की ओर लौटने लगे। लेकिन वापस लौटने के बाद उन्हें तबाही का सामना करना पड़ रहा है। घरों में कीचड़ भरा है और जरूरत का ज्यादातर सामान बाढ़ में बह चुका है।

जरेखेत, बरगापुल, गजुरी और फुर्के खोला समेत कई इलाकों में करीब 12 पुल बहने की जानकारी सामने आई है। पुलों के टूटने से लोगों का एक-दूसरे से संपर्क प्रभावित हुआ है। आवागमन बाधित होने के कारण रोजगार, कारोबार और जरूरी सामान की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। अब पानी घटने के साथ लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दो वक्त की रोटी जुटाने की है।

कहीं चूल्हा नहीं, कहीं राशन भी बह गया

बाढ़ के दौरान परिवारों ने सबसे पहले बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पानी उतरने के बाद भोजन और रोजगार का संकट सामने खड़ा होगा। कई परिवारों के चूल्हे टूट चुके हैं तो कई घरों में राशन का एक दाना तक नहीं बचा है। साफ पानी की समस्या भी बनी हुई है। प्रभावित लोगों को खाने-पीने की सामग्री, दवाइयों और सुरक्षित रहने की जगह की जरूरत है।

रात होते ही लोगों की चिंता और बढ़ जाती है। जिन घरों की छतें किसी तरह बची हैं, वहां भी परिवार खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। बच्चों को लेकर माता-पिता सबसे ज्यादा परेशान हैं।

राहत मिली, लेकिन पुनर्वास की बड़ी जरूरत

जलप्रलय के बाद प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत है। स्थानीय नगर पालिका की ओर से लोगों के लिए भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, राहत सिर्फ कुछ दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है। प्रभावित परिवारों को दोबारा घर बनाने, रोजगार शुरू करने और बच्चों की पढ़ाई बहाल करने के लिए लंबे समय तक मदद की आवश्यकता होगी। पुल और सड़कें टूटने से राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। इसलिए प्रशासन के सामने तत्काल राहत के साथ-साथ सड़क, पुल, घर और बाजार को दोबारा खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

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बाढ़ के बाद शुरू हुई जिंदगी की नई जंग

नेपाल के नुवाकोट और गल्छी बाजार में बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। किसी का घर उजड़ा है, किसी की दुकान खत्म हो गई और किसी का अपना लापता है।

अब इन परिवारों के सामने जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की चुनौती है। मलबे में दबे सामान को निकालते लोगों की आंखों में भविष्य की चिंता साफ दिखाई देती है। उनके लिए यह सिर्फ बाढ़ से उबरने की लड़ाई नहीं, बल्कि घर, रोजगार, परिवार और दो वक्त की रोटी को फिर से हासिल करने की जंग है।

Location :  New Delhi

Published :  30 August 2026, 8:50 AM IST

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