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दही से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं (Img: Pinterest)
New Delhi: दही... इसका नाम सुनते ही किसी काम पर जाने से पहले चीनी के साथ दही खाने की मीठी रस्म या धार्मिक आयोजनों में चढ़ाया जाने वाला पंचामृत याद आ जाता है। भारतीय घरों में दही सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाली चीज नहीं है; सदियों से इसे शुभता का प्रतीक माना जाता रहा है। फिर भी क्या आप उन मान्यताओं के बारे में जानते हैं जो दही को अशुभ संकेतों से जोड़ती हैं? एक मान्यता तो ऐसी भी है जो इसे सीधे रामायण काल के रावण से जोड़ती है।
घर से निकलने से पहले किसी को दही-चीनी खिलाना भारत की एक पुरानी परंपरा है। चाहे परीक्षा हो, इंटरव्यू हो या कोई नया काम शुरू करना हो, घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर अपनों को यह मिश्रण खिलाकर ही विदा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे मन शांत रहता है और काम में सफलता मिलती है।
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ज्योतिष शास्त्र में दही का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। जब कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो दही खाना शुभ माना जाता है। वहीं काले तिल के साथ दही का दान करने से राहु ग्रह से जुड़ी परेशानियां दूर होने की मान्यता है।
धार्मिक ग्रंथों में दही खाने के सही समय के बारे में भी बताया गया है। स्कंद पुराण के काशी खंड में कहा गया है "रात्रौ न दधि भोक्तव्यम्" यानी रात में दही नहीं खाना चाहिए। यह एक धार्मिक मान्यता है और इसे वैज्ञानिक सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
परंपरा के अनुसार, दही का गिरना अशुभ माना जाता है। घर से निकलते समय इसका गिरना तो बहुत ही बुरा शकुन माना जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि बार-बार दही गिरने से घर में मुसीबत आ सकती है। इसी वजह से गिरे हुए दही पर पैर रखना भी वर्जित माना जाता है।
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दही से जुड़ी सबसे दिलचस्प मान्यताओं में से एक रामायण काल की है। कहा जाता है कि माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी लंका में रावण के महल पहुंचे थे। वहां उन्होंने रावण की जूठी थाली देखी थी। माना जाता है कि थाली में बचा हुआ दही देखकर हनुमान को एहसास हो गया कि रावण का अंत निकट है। थाली में दही छोड़ना कम उम्र होने का संकेत माना जाता था। हालांकि, ऐसी धारणाएं धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं; इनके समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
Location : New Delhi
Published : 9 September 2026, 2:57 PM IST