BCCI पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 के दायरे से बाहर क्यों रखा जाए?

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों से कहा है कि वे निर्देश लेकर बताएं कि उनके पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा शर्तों को राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 के दायरे में क्यों नहीं रखा जाना चाहिए। अदालत के इस सवाल के बाद यह मुद्दा अहम हो गया है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 9 September 2026, 2:32 PM IST
google-preferred

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राज्य क्रिकेट संघों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा सवाल उठाया है। अदालत ने बीसीसीआई और सभी राज्य क्रिकेट संघों से पूछा है कि उन्हें राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के तहत क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को बीसीसीआई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।

पदाधिकारियों की सेवा शर्तों पर भी मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों से कहा है कि वे निर्देश लेकर बताएं कि उनके पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा शर्तों को राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 के दायरे में क्यों नहीं रखा जाना चाहिए।

अदालत के इस सवाल के बाद यह मुद्दा अहम हो गया है कि देश में क्रिकेट संचालन की सबसे बड़ी संस्था बीसीसीआई और उससे जुड़े राज्य संघों पर नए खेल कानून के प्रावधान किस तरह लागू होंगे।

2014 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

बीसीसीआई के कामकाज और क्रिकेट प्रशासन में सुधार से जुड़ा मामला साल 2014 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस दौरान अदालत ने क्रिकेट बोर्ड के प्रशासन में सुधार के लिए कई अहम फैसले दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति को बीसीसीआई में सुधार के सुझाव देने और बोर्ड के लिए नए संविधान का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की कई सिफारिशों को मंजूरी देते हुए बीसीसीआई के ढांचे और कामकाज में बदलाव लागू किए थे।

बीसीसीआई पदाधिकारियों के कार्यकाल पर पहले बदले थे नियम

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2022 में बीसीसीआई पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर अपने पुराने आदेश में बदलाव किया था।

इसके तहत किसी पदाधिकारी को राज्य क्रिकेट संघ और बीसीसीआई में मिलाकर कुल 12 साल तक पद पर रहने की अनुमति दी गई थी।

इस व्यवस्था के अनुसार:

  • राज्य क्रिकेट संघ में 6 साल तक कार्यकाल
  • बीसीसीआई में 6 साल तक कार्यकाल
  • इसके बाद 3 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड

का प्रावधान रखा गया था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि कोई पदाधिकारी बीसीसीआई और राज्य संघ दोनों स्तरों पर किसी पद पर लगातार दो कार्यकाल पूरा कर सकता है। इसके बाद उसे तीन साल के लिए पद से बाहर रहना होगा।

पहले क्या था नियम?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर बीसीसीआई संविधान में लगातार दो बार तीन-तीन साल के कार्यकाल पूरे करने वाले पदाधिकारियों के लिए तीन साल का अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 के प्रावधान बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों पर किस हद तक लागू होंगे।

अदालत ने सभी संबंधित पक्षों से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

Location :  New Delhi

Published :  9 September 2026, 2:32 PM IST

Related News

Advertisement