“ग्रेटर नोएडा का मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है?’ CJI सूर्यकांत ने CJP प्रोटेस्ट मामले में लगाई फटकार

CJP प्रोटेस्ट में शामिल होने की अपील करने वाले लॉ स्टूडेंट को नोटिस जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी, तो नोटिस जारी करने का अधिकार कैसे दिया गया। कोर्ट ने मामले में अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 9 September 2026, 2:47 PM IST
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Greater Noida News: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने वाले एक लॉ स्टूडेंट को शांति व्यवस्था बनाए रखने का नोटिस देना ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को भारी पड़ गया। मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए बुधवार को मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी, तो फिर नोटिस कैसे जारी किया गया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की इजाजत किसी अधिकारी को नहीं है। CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "कोई मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? हमने साफ कहा था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। कोई भी मजिस्ट्रेट हमारे आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।"

लॉ स्टूडेंट को जारी किया गया था नोटिस

मामला ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट III की अदालत से जुड़ा है। यहां दूसरे साल के लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी किया गया था। बताया गया कि यह कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया था कि छात्र दूसरे विद्यार्थियों को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था और सरकार विरोधी बातें फैला रहा था। 4 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में छात्र पर आरोप लगाया गया था कि वह यूनिवर्सिटी के छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

वकील ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मामला

यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि नोएडा पुलिस की जानकारी पर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी किया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बाद में मीडिया में खबर आने के बाद नोटिस वापस ले लिया गया, लेकिन केवल नोटिस वापस लेने से मामला खत्म नहीं होता। वकील ने इसे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना बताते हुए कहा कि अधिकारियों की ऐसी कार्रवाई से छात्रों के मन में डर का माहौल पैदा हो सकता है।

नोटिस वापस लेने के बाद भी क्यों उठा सवाल?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि जब नोटिस वापस लिया जा चुका है तो फिर कार्रवाई का आधार क्या बचता है। इस पर वकील ने कहा कि अदालत की अवमानना केवल नोटिस वापस लेने से खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यह देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश और उसकी गरिमा से जुड़ा मामला है। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने वकील से कहा कि वह इस मामले को याचिका के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाएं। कोर्ट ने संकेत दिया कि संबंधित अधिकारी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठे सवाल

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को छात्रों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के मामले में निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने कहा था कि CJP प्रदर्शन को लेकर छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और पहले दर्ज FIR पर भी कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है कि जब छात्रों को सुरक्षा दी गई थी, तो ग्रेटर नोएडा प्रशासन की ओर से ऐसा नोटिस क्यों जारी किया गया। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा हो सकती है।

Location :  Greater Noida

Published :  9 September 2026, 2:43 PM IST

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