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भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा (Source- X)
New Delhi: भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने रविवार को इतिहास रच दिया। उन्होंने विश्व कप फाइनल की पुरुष रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर वह उपलब्धि हासिल की, जो भारतीय पुरुष तीरंदाजी में अब तक किसी के नाम नहीं थी। धीरज ने जापान के नाकानिशी जुन्या को रोमांचक शूट-ऑफ में हराकर गोल्ड अपने नाम किया।
धीरज और नाकानिशी के बीच मुकाबला बेहद कड़ा रहा। पांच सेट के बाद दोनों खिलाड़ी 5-5 की बराबरी पर थे। इसके बाद फैसला शूट-ऑफ से हुआ। धीरज ने शूट-ऑफ में 10 अंक हासिल किए, जबकि जापानी तीरंदाज 9 अंक ही बना सके। इस तरह धीरज ने 10-9 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
इस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार निशाने लगाए। पांच सेट के स्कोर 28-28, 28-29, 29-28, 28-30 और 28-27 रहे। धीरज के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वह 2023 और 2024 के विश्व कप फाइनल में पदक नहीं जीत सके थे।
धीरज की इस जीत ने भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी के 16 साल लंबे इंतजार को खत्म कर दिया। इससे पहले जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। अब धीरज विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं।
महिला वर्ग में डोला बनर्जी भारत के लिए यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने 2007 में दुबई में विश्व कप फाइनल का महिला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था।
धीरज की ऐतिहासिक जीत के पीछे संघर्ष की एक भावुक कहानी भी है। वर्ष 2017 में उनके करियर का मुश्किल दौर आया। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी।
ऐसे समय में उनकी मां रेवती ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अपना मंगलसूत्र गिरवी रखकर कर्ज लिया, ताकि धीरज के लिए नया धनुष खरीदा जा सके। उनके पिता श्रवण कुमार ने भी बेटे की मदद के लिए तीरंदाजी के जज की भूमिका निभाई।
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आर्थिक परेशानियों और करियर के संघर्ष के बीच धीरज ने एक समय तीरंदाजी छोड़ने का भी मन बना लिया था। लेकिन परिवार के भरोसे और लगातार मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत दी।
25 वर्षीय धीरज ने इस साल जून में तुर्किये के अंताल्या में विश्व कप स्टेज-3 में दो स्वर्ण पदक भी जीते थे। अब विश्व कप फाइनल का गोल्ड उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
धीरज बोम्मादेवरा की जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी के इतिहास में एक नया अध्याय है। परिवार के संघर्ष से लेकर विश्व मंच पर तिरंगा लहराने तक का उनका सफर युवाओं और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गया है।
Location : New Delhi
Published : 14 September 2026, 7:50 AM IST