Commonwealth Games 2026: भारत की झोली में गोल्ड, जूडो में अस्मिता और हर्ष ने कर दिखाया कमाल

ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों के नौवें दिन भारतीय जूडाकों ने सुपर से ऊपर कमाल करते हुए इतिहास रच दिया। जहां वीमेंस कैटेगिरी में अस्मिता डे ने सुनहरे अक्षरों में नाम दर्ज कराया, तो कुछ ऐसा ही कारनामा हर्ष सिंह ने किया।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 1 August 2026, 1:57 AM IST
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New Delhi: भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने जूडो में शुक्रवार को दो स्वर्ण और रजत पदक जीता। सबसे पहले अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग में सोना अपने नाम किया और फिर हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता।

हर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे और पहले पुरुष जूडोका हैं। अस्मिता और हर्ष से पहले अब तक किसी भारतीय जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता है। वहीं, महिला 57 किग्रा वर्ग में यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीता।

स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय

अस्मिता डे  स्वर्णिम जीत के  साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई। उन्होंने 48 किलो वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर' मुकाबले में मात दी।  त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता शुरूआत में पिछड़ गई थी और उन्हें पेनल्टी भी लगी।

उन्होंने हालांकि शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1.1 से हराकर किया. चार मिनट के मुकाबले में दोनों में से किसी को निर्णायक स्कोर नहीं मिल सका जिससे मुकाबला गोल्डन स्कोर में गया। इसमें पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है।अस्मिता ने सडन डैथ में आक्रामक प्रदर्शन करके जीत दर्ज की।

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हर्ष ने 60 किलो में स्वर्ण जीता

वहीं, हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरुषों के 60 किलो फाइनल में शुक्रवार को स्वर्ण पदक जीता। पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया।

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कठिन थी डगर

अस्मिता डे का सफर भी प्रेरणादायक रहा है। त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता साइकिल मैकेनिक थे।आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने जूडो को अपना करियर बनाया। शुरुआत में वह 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थीं, लेकिन बाद में अपने पहले कोच की सलाह पर जूडो की ओर रुख किया। वर्ष 2015 में वह त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल से जुड़ीं।

Location :  New Delhi

Published :  1 August 2026, 1:54 AM IST

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