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गया कैसे बना पितृ मोक्ष की सबसे पवित्र भूमि? (Img- Pinrterest)
Gaya: बिहार का गया जिला सदियों से सनातन धर्म में पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए यहां आकर पिंडदान और तर्पण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गया की पावन धरती पर किया गया पिंडदान सीधे पितरों तक पहुंचता है और उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा था जब यह स्थान एक महान असुर की तपस्या और उसके बाद भगवान विष्णु द्वारा दिए गए वरदान के कारण अमर तीर्थ बन गया? वायु पुराण में इस पौराणिक कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
वायु पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में गयासुर नाम का एक बेहद शक्तिशाली और धर्मपरायण असुर था। उसने हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या करके सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया। जब ब्रह्मा जी ने उससे वरदान मांगने को कहा, तो गयासुर ने मांगा कि जो भी मनुष्य उसका दर्शन कर ले या उसका स्पर्श करे, उसके सभी पाप तत्काल नष्ट हो जाएं और उसे सीधे देवलोक में स्थान मिले।
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इस वरदान के मिलते ही पापियों को भी मुक्ति मिलने लगी और यमलोक पूरी तरह खाली होने लगा। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और यमराज व अन्य देवता व्याकुल होकर ब्रह्मा जी की शरण में पहुंचे।
सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए देवताओं ने एक दिव्य योजना बनाई। ब्रह्मा जी ने गयासुर से कहा कि उन्हें एक अत्यंत पवित्र यज्ञ करना है और पूरी सृष्टि में गयासुर के विशाल और पवित्र शरीर से बेहतर कोई स्थान नहीं है। गयासुर ने सहर्ष स्वीकृति दे दी और अपनी देह को यज्ञवेदी के रूप में अर्पित कर दिया।
यज्ञ समाप्त होने के बाद भी जब गयासुर की देह हिलने लगी, तो उसे स्थिर करने के लिए उसकी पीठ पर एक भारी शिला रखी गई। इसके बाद स्वयं भगवान विष्णु 'गदाधर' रूप में प्रकट हुए और सभी देवताओं के साथ उस शिला पर विराजमान होकर गयासुर को पूरी तरह स्थिर किया।
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गयासुर की इस असीम भक्ति और निस्वार्थ त्याग से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। श्रीहरि ने उसे वरदान दिया कि यह क्षेत्र अब से उसके नाम पर 'गया' के रूप में विख्यात होगा। इसके साथ ही विष्णु जी ने वचन दिया कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर आकर अपने पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करेगा, उसके पूर्वजों को सीधे विष्णुलोक की प्राप्ति होगी।
जिस शिला पर भगवान विष्णु के चरण पड़े, वह आज 'विष्णुपद मंदिर' के नाम से विश्व प्रसिद्ध है, जबकि गयासुर की पीठ पर रखी शिला 'प्रेत शिला' के रूप में पूजी जाती है। यही कारण है कि गया आज पितृ मोक्ष का सबसे बड़ा धाम माना जाता है।
Location : New Delhi
Published : 2 October 2026, 4:22 PM IST
Topics : Bihar News Gaya News Hindu rituals Pind Daan