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संत प्रेमानंद महाराज (Img: Pinterest)
Mathura: संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम और वहां की गतिविधियों को लेकर अब मामला चर्चा में है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार दिनेश फलाहारी ने संत की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने श्रीहित राधा केलिकुंज आश्रम और उसके आसपास की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं, दूसरी ओर ब्रज के कुछ संत और भागवताचार्य प्रेमानंद महाराज के समर्थन में सामने आए हैं और बिना पूरी जानकारी के उनके खिलाफ बयानबाजी पर आपत्ति जताई है।
दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि श्रीहित राधा केलिकुंज आश्रम से जुड़ी गतिविधियों को लेकर दो पक्षों के बीच मतभेद बताए जा रहे हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि आश्रम की आड़ में संपत्ति और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े कुछ लोग सक्रिय हुए हैं। उन्होंने आश्रम की गतिविधियों और आसपास के हालात की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, पत्र में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
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दिनेश फलाहारी के अनुसार, आश्रम से जुड़ी संपत्ति और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कथित विवाद के बाद संत प्रेमानंद महाराज बेलवन स्थित आश्रम चले गए। पत्र में केलिकुंज आश्रम के आसपास बच्चों के गायब होने और संदिग्ध लोगों की गतिविधियों को लेकर भी आशंकाएं जताई गई हैं। इन दावों की भी जांच की आवश्यकता बताई गई है। पत्र लिखने वाले का कहना है कि संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में ब्रज के कई संत और भागवताचार्य सामने आए हैं। उनका कहना है कि किसी भी घटना या विवाद की पूरी सच्चाई जाने बिना संत के खिलाफ टिप्पणी करना उचित नहीं है। भागवताचार्य चित्रलेखा ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज के बारे में कई लोग बिना पूरी जानकारी के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधूरी जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति के बारे में टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
मलूक पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज का नाम लिए बिना कहा कि समाज कई बार बड़े संतों और महापुरुषों की आलोचना करने में देर नहीं करता, लेकिन उनके सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को नजरअंदाज कर देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के बारे में राय बनाने से पहले उसके कार्यों और योगदान को भी देखना चाहिए।
भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य ने भी संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूरी सच्चाई जाने संत को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े हैं और उनके अनुसार कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि किसी संत के खिलाफ आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी जानकारी होना जरूरी है।
फिलहाल मामला दो अलग-अलग पक्षों के दावों और बयानों के बीच है। एक तरफ संत की सुरक्षा और आश्रम की गतिविधियों की जांच की मांग की गई है, जबकि दूसरी तरफ संतों और भागवताचार्यों ने प्रेमानंद महाराज के खिलाफ बिना तथ्यों के बयानबाजी पर सवाल उठाए हैं। आश्रम से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
Location : Mathura
Published : 5 October 2026, 12:41 PM IST