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ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। हालिया विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी में हुई बड़ी टूट ने अब ममता बनर्जी और उनके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, TMC के कुल 80 विधायकों में से 58 बागी विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए हैं। इस घटनाक्रम को पार्टी के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
बागी विधायकों ने पार्टी से निष्कासित नेता रितव्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नया नेता चुन लिया है। बताया जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस दावे को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद विधानसभा में ममता बनर्जी के समर्थन में केवल 21 विधायक ही बचे हैं।
विधायकों के अलावा पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों के भी ममता खेमे से अलग होने की खबर है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर भी TMC की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है।
बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी में बढ़ते वंशवाद और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते हस्तक्षेप ने संगठन को कमजोर किया है। उनका कहना है कि फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गए थे, जिससे कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ी।
विपक्षी दलों और बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी के कई नेता भ्रष्टाचार के मामलों और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दबाव में राजनीतिक पाला बदल रहे हैं। इस मुद्दे ने TMC की छवि को भी प्रभावित किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टूट बरकरार रहती है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। आने वाले दिनों में TMC के भीतर की स्थिति और राज्य की राजनीतिक दिशा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
Location : Kolkata
Published : 9 June 2026, 2:30 PM IST