TMC के बागी सांसदों पर अब भी मंडरा रहा खतरा? कपिल सिब्बल ने बताई कानूनी चाल, ममता के पास ‘ब्रह्मास्त्र’

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। टीएमसी के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया है और एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। इस कदम के बाद कपिल सिब्बल ने इसे लोकतंत्र का “थिएटर ऑफ द एब्सर्ड” बताते हुए बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 15 June 2026, 10:14 AM IST
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New Delhi: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लगातार दूसरे दिन बड़ा झटका लगा है। पार्टी के बागी सांसदों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है और अपनी राजनीतिक राह अलग करने का ऐलान कर दिया है। बागी सांसदों ने कानूनी दांव-पेच से बचने और अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में विलय की घोषणा कर दी है।

लोकसभा स्पीकर से मिले बागी सांसद

NCPI में विलय के ऐलान के बाद बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने संसद में अलग बैठने की अनुमति मांगी और इस संबंध में एक पत्र भी सौंपा। बागी गुट का कहना है कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और नियमों के तहत उनका कदम पूरी तरह वैध है। बागी सांसदों ने दावा किया है कि उनके साथ दो-तिहाई से ज्यादा सांसद मौजूद हैं, इसलिए उन पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती। उनका कहना है कि उन्होंने सोच-समझकर यह फैसला लिया है और अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे।

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कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल

वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कड़ा हमला बोला है। उन्होंने टीएमसी के बागी सांसदों के NCPI में विलय के फैसले को लोकतंत्र का “थिएटर ऑफ द एब्सर्ड” यानी बेतुकेपन का मंच बताया है। कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि किसी भी विधायक दल का दूसरी पार्टी में विलय तभी संभव है, जब मूल राजनीतिक दल यानी तृणमूल कांग्रेस इसकी अनुमति दे। उन्होंने कहा कि सांसद अपनी मर्जी से किसी दूसरी पार्टी में शामिल होकर कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकते।

टीएमसी ने भी शुरू की कानूनी लड़ाई की तैयारी

उधर तृणमूल कांग्रेस ने भी इस बगावत के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि सदन में केवल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को ही मान्यता दी जाए। टीएमसी की ओर से कहा गया है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व सिर्फ अधिकृत फ्लोर लीडर और व्हिप करेंगे। पार्टी ने यह भी साफ किया है कि किसी अलग गुट को कोई मान्यता, सुविधा या अलग दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। टीएमसी नेता कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने स्पीकर के आवास पर यह पत्र सौंपा है। पार्टी का कहना है कि बागी सांसदों का दावा संवैधानिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती दी जाएगी।

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बागी गुट ने किया दो-तिहाई समर्थन का दावा

बागी खेमे की ओर से काकोली घोष ने दावा किया है कि उनके साथ दो-तिहाई से ज्यादा सांसद हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें किसी तरह की कानूनी परेशानी नहीं होगी। वहीं वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी दावा किया कि उनका गुट आधिकारिक रूप से NCPI में विलय कर चुका है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों के हस्ताक्षरों का सत्यापन किया है और उनके पास पर्याप्त संख्या बल है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जुलाई में उनका गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर सकता है। उनका कहना है कि आखिरकार यह फैसला अदालत करेगी कि असली टीएमसी कौन है।

पार्टी में अनदेखी का लगाया गया आरोप

टीएमसी के पूर्व नेता अभिजीत मजूमदार ने इस बगावत के पीछे पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रही नाराजगी को वजह बताया है। उनका आरोप है कि कई नेताओं और सांसदों को सम्मान नहीं मिला और उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन नेताओं को जनता ने बीजेपी के विरोध के नाम पर चुना था, वे अब अपनी राजनीतिक दिशा बदल रहे हैं।

Location :  New Delhi

Published :  15 June 2026, 10:14 AM IST

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