हिंदी
धर्मेंद्र प्रधान (Source: Pinterest )
New Delhi: Dharmendra Pradhan Resignation को लेकर अब परदे के पीछे की तस्वीर सामने आने लगी है। बताया जा रहा है कि इस्तीफे से पहले तक केंद्र सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बचाव में जुटी थी, लेकिन खुफिया एजेंसियों और शीर्ष स्तर से मिली रिपोर्टों ने हालात पूरी तरह बदल दिए। इन रिपोर्टों में छात्र आंदोलन के लगातार फैलने और स्थिति के नियंत्रण से बाहर जाने की आशंका जताई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, Dharmendra Pradhan Resignation से लगभग 24 घंटे पहले आईबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो नीट पेपर लीक को लेकर चल रहा आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का प्रदर्शनकारियों पर अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है।
बताया जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह की रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई थी कि यदि आंदोलन को समय रहते नहीं संभाला गया तो विपक्षी दलों की एकजुटता और मजबूत हो सकती है। वहीं भाजपा और संघ से जुड़े फीडबैक में कई राज्यों में छात्र आंदोलन के विस्तार की आशंका जताई गई। इन इनपुट्स ने सरकार के भीतर रणनीतिक स्तर पर चिंता बढ़ा दी।
हर सुबह इस रास्ते पर दांव पर लगती है जिंदगी… वहीं फिर मंडराने लगा मौत का साया
Dharmendra Pradhan Resignation से पहले आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी तेजी से कदम उठाए गए। राजधानी दिल्ली में केंद्रीय बलों की 45 कंपनियां तैनात की गईं। इसके अलावा आईबी के इनपुट के आधार पर 16 अतिरिक्त कंपनियों को विभिन्न राज्यों से दिल्ली बुलाने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थीं।
पिता ने पड़ोसियों पर लगाया हत्या का आरोप… लेकिन जांच में खुला ऐसा राज कि हर कोई रह गया सन्न
रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार को उम्मीद थी कि सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बाद छात्र आंदोलन की तीव्रता कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके उलट कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए। इसी के बाद सरकार ने स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया और आगे की रणनीति पर तेजी से निर्णय लिए।
Location : New Delhi
Published : 26 July 2026, 3:20 PM IST