Amethi: हिंदी पखवाड़े में क्यों हुई कार्यशैली बदलने की बात? अमेठी विश्वविद्यालय में मिला बड़ा संदेश
राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय, अमेठी में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। पूर्व सूचना आयुक्त सी.के. पांडेय ने हिंदी को दैनिक कार्यशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। कुलपति प्रो. भृगु नाथ सिंह ने कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग और विद्यार्थियों को प्रांतीय भाषाओं के सम्मान के लिए प्रेरित किया।
अमेठी। राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ इस संदेश के साथ हुआ कि हिंदी केवल बोलचाल की भाषा तक सीमित न रहे, बल्कि दैनिक कार्यालयीन कार्यशैली का भी हिस्सा बने। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व सूचना आयुक्त, उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग सी.के. पांडेय ने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया।
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समारोह में सी.के. पांडेय ने कहा कि हिंदी पखवाड़ा युवाओं को अपनी भाषा के प्रति जागरूक करने का बेहतर माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिंदी को अपनी दैनिक कार्यशैली का हिस्सा बनाने और अपनी क्षमता के अनुसार उसे प्राथमिकता देने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन को प्रेरणादायक आयोजन के लिए बधाई दी और हिंदी पखवाड़े के दौरान होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं की सफलता की कामना की।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भृगु नाथ सिंह ने कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की विविध संस्कृतियों को एकता के सूत्र में बांधने का काम करती है।
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कुलपति ने विद्यार्थियों से हिंदी के साथ-साथ अपनी-अपनी प्रांतीय भाषाओं के सम्मान और उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता को सम्मान देते हुए हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। कार्यक्रम के साथ विश्वविद्यालय में ऑनलाइन हिंदी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इसमें भारतीय प्रबंधन संस्थान, अमृतसर के प्रबंधक (राजभाषा) श्री गोपाल ने अतिथि वक्ता के रूप में सहभागिता की। उन्होंने राजभाषा नीति और उसके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
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विश्वविद्यालय में एक सितंबर से 30 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान छात्रों और कर्मचारियों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इनमें हिंदी निबंध लेखन, तकनीकी शब्दावली, वाद-विवाद, काव्य पाठ और प्रश्नोत्तरी जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं। विश्वविद्यालय का यह आयोजन हिंदी को केवल एक विषय या औपचारिक भाषा के बजाय शिक्षा और कार्यालयीन कामकाज की नियमित कार्यशैली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।