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25 जुलाई के वादे से पलटी सरकार? (Img- Dynamite News)
Patna: 25 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के बीच एक अहम समझौता हुआ था। इसमें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने और किसी भी छात्र पर कार्रवाई न करने का भरोसा दिया गया था। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बिहार के पटना, छपरा, बेगूसराय और सीतामढ़ी जैसे जिलों में पुलिस सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालकर प्रदर्शनकारियों को चिह्नित कर रही है और लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं।
सड़कों पर पुलिसिया एक्शन शुरू होते ही CJP ने एक्स (ट्विटर) पर मोर्चा खोल दिया है। सीजेपी ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी को टैग करते हुए साफ शब्दों में लिखा कि जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए भरोसे को न तोड़ा जाए। पार्टी ने आग्रह किया कि पूरे देश की पुलिस 25 जुलाई के दिल्ली समझौते का पूरी तरह पालन करे और छात्रों पर दर्ज सभी फर्जी मामले तुरंत रद्द किए जाएं।
Dear @samrat4bjp & @SuvenduWB,
Don't break the assurance given by @JPNadda & @DrJitendraSingh. Drop all criminal cases put on the protestors.
— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 26, 2026
इस मुद्दे पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर करारा प्रहार किया है। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक परंपराओं को ताक पर रखकर छात्रों पर कठोरता से कार्रवाई की गई है।
7 हत्याओं का आरोपी बिहार का मुख्यमंत्री सड़क छाप अपराधी है जिसने तमाम लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग देश में पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 से गोली चलवाई है।
छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हज़ारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है, परिजनों को…
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) July 27, 2026
उन्होंने कहा कि समझौते के बावजूद हजारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर उनके परिजनों को प्रताड़ित किया जा रहा है। तेजस्वी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो इस तानाशाही का अंजाम एनडीए सरकार को भुगतना पड़ेगा।
इस्तीफा मिला, लेकिन आंदोलन नहीं रुका! बिहार बंद ने दिया छात्रों के अगले मिशन का बड़ा संकेत
गौरतलब है कि दिल्ली वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मुआवजे के साथ-साथ सबसे बड़ी शर्त यही थी कि देशभर में आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमों को रद्द किया जाएगा। सभी शर्तें मान भी ली गई थीं, लेकिन समझौते के बाद भी जारी गिरफ्तारियों ने अब एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
Location : Patna
Published : 27 July 2026, 2:12 PM IST