91 लाख वोटर लिस्ट से गायब! सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकता है बड़ा फैसला, क्या बदलेगा बंगाल चुनाव का खेल?

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। आज की सुनवाई कई बड़े सवालों के जवाब दे सकती है, लेकिन इसके असर चुनाव पर कितना पड़ेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 13 April 2026, 9:07 AM IST
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New Delhi: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आज सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर अहम सुनवाई होने जा रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच इस मामले पर विचार करेगी।

यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल से शुरू होने वाली है, जिससे इस फैसले का चुनावी असर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

91 लाख नाम हटने से मचा सियासी भूचाल

चुनाव आयोग द्वारा 9 अप्रैल को जारी SIR सूची के बाद पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। यह कुल मतदाताओं का लगभग 11.85% हिस्सा है। अक्टूबर 2025 में राज्य में 7.66 करोड़ वोटर थे, जो अब घटकर करीब 6.76 करोड़ रह गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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मालदा घटना भी सुनवाई में शामिल

सुप्रीम कोर्ट इस मामले के साथ मालदा जिले की एक गंभीर घटना पर भी सुनवाई करेगा। 1 अप्रैल को सुजापुर में SIR के विरोध में हजारों लोगों ने BDO कार्यालय का घेराव कर लिया था। इस दौरान सात न्यायिक अधिकारी करीब 9 घंटे तक अंदर फंसे रहे। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

सीमा जिलों में सबसे ज्यादा असर

वोटर लिस्ट से नाम हटने का सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में देखने को मिला है। नॉर्थ 24 परगना जैसे क्षेत्रों में लाखों नाम सूची से हटाए गए। जांच के दायरे में आए 60 लाख से अधिक मामलों में से बड़ी संख्या में नाम निरस्त किए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर भी असंतोष बढ़ा है।

TMC और चुनाव आयोग आमने-सामने

इस मुद्दे पर सियासी टकराव भी खुलकर सामने आया है। 8 अप्रैल को सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा। पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्हें ठीक से सुना नहीं गया और बैठक में खराब व्यवहार किया गया। वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा TMC पर ही अनुशासनहीनता का आरोप लगाया।

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देशभर में भी पड़ा असर

SIR प्रक्रिया केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया के तहत कुल 6.08 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। उत्तर प्रदेश में ही करीब 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटे हैं। इससे पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सटीकता पर बहस तेज हो गई है।

पहले भी कोर्ट जता चुका है चिंता

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए थे कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में कुछ खामियां हो सकती हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुचारु रही। कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर किसी को विशेष आपत्ति है, तो वह उसे अदालत के सामने रख सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  13 April 2026, 9:07 AM IST

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