एक साल बाद भी नहीं भरा जख्म: सुनिये पहलगाम पीड़ित परिवारों की कहानी

पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर पीड़ित परिवारों का दर्द फिर उभर आया है। 26 लोगों की मौत के बाद भी परिजन सदमे से उबर नहीं पाए हैं और सरकार से किए वादों के पूरे होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 22 April 2026, 11:10 AM IST
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New Delhi: आज पहलगाम आतंकी हमले को एक साल हो गया है। पहली बरसी पर जहां देश आगे बढ़ता दिख रहा है, वहीं पीड़ित परिवारों के लिए समय जैसे थम गया है। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। एक साल बाद भी उनके परिवार इस गहरे सदमे से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

परिवारों की जिंदगी में ठहराव

हमले में मारे गए संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले बताती हैं कि एक साल में उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। परिवार आज भी भावनात्मक आघात से जूझ रहा है। सरकार के वादों को पूरा करने की प्रक्रिया भी उनके लिए संघर्षपूर्ण रही है।

जिम्मेदारियों का बोझ और अधूरी उम्मीदें

प्रशांत कुमार सतपथी की पत्नी प्रियदर्शनी आचार्य के लिए यह घटना जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बन गई। उन्होंने बताया कि पति की मौत के बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई। सरकारी नौकरी, बच्चे की पढ़ाई और आर्थिक सहायता जैसे वादों का इंतजार अब भी जारी है, जिससे उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

कुछ परिवारों को मिली राहत

वहीं संतोष जगदाले की पत्नी प्रगति जगदाले ने कहा कि उनके परिवार को सरकार से मदद मिली और वादे पूरे किए गए। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए सरकार की कार्रवाई की सराहना की, लेकिन साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग भी की।

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शहादत की यादें और सम्मान की मांग

हमले में मारे गए सैन्य अधिकारी विनय नरवाल के परिवार ने गहरा दुख जताया। उनके पिता ने कहा कि बेटे की मौत ने उनकी जिंदगी को रोक दिया। परिवार ने सरकार से अपील की है कि उनके बेटे की याद में किसी स्कूल या अस्पताल का नाम रखा जाए, ताकि उनकी शहादत को सम्मान मिल सके।

इंसानियत की मिसाल बने आदिल हुसैन

कश्मीर के सैयद आदिल हुसैन के परिवार ने उन्हें इंसानियत की मिसाल बताया। उनके पिता ने कहा कि आदिल ने धर्म से ऊपर उठकर लोगों की जान बचाने की कोशिश की। उनके भाई नौशाद ने कहा कि परिवार आज भी उन्हें याद कर रोता है, लेकिन उनकी शहादत से उन्हें गर्व भी है।

स्मारक के जरिए जिंदा रहेंगी यादें

शहीद तागे हैल्यांग के परिवार ने उनकी याद में एक स्मारक बनाने का निर्णय लिया है। उनके पैतृक गांव में बन रहे इस स्मारक में उनकी कांस्य प्रतिमा और जीवन की कहानी शामिल होगी। परिवार का कहना है कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को उनकी बहादुरी से परिचित कराएगा।

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दर्द जो समय से नहीं मिटा

एक साल बीतने के बावजूद पहलगाम हमले के पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। हर सरकारी बयान, हर खबर और हर चर्चा उनके जख्मों को फिर ताजा कर देती है। उनके लिए यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि जिंदगी भर का घाव बन चुका है।

Location :  New Delhi

Published :  22 April 2026, 11:10 AM IST

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