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कैसे बदली ग्रामीण रोजगार योजना? (Image Source: AI)
New Delhi: करीब दो दशक तक देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) अब इतिहास बन गया है। इसकी जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB G-RAM-G Act) पूरे देश में लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह सिर्फ रोजगार देने वाली योजना नहीं, बल्कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक व्यापक ग्रामीण विकास मॉडल है।
सरकार के मुताबिक नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों की जगह 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही योजना का फोकस केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों (Assets) के निर्माण, कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी रहेगा।
ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी देने के लिए वर्ष 2005 में मनरेगा कानून बनाया गया था। इसका उद्देश्य था कि हर ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों का अकुशल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। 2 फरवरी 2006 को इसे देश के 200 जिलों में लागू किया गया और 1 अप्रैल 2008 तक इसका विस्तार पूरे देश में हो गया।
कोविड-19 महामारी के दौरान जब लाखों प्रवासी मजदूर गांव लौटे, तब मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया। उस दौर में रिकॉर्ड संख्या में लोगों को रोजगार मिला और योजना की उपयोगिता फिर साबित हुई। अब वर्ष 2025 में संसद द्वारा पारित VB G-RAM-G कानून के लागू होने के साथ मनरेगा की जगह नई व्यवस्था ने ले ली है।
कैसे बदली ग्रामीण रोजगार योजना? (Img: AI)
नए कानून में सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की अवधि को लेकर किया गया है। अब पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी।
इसके अलावा सरकार ने योजना के दायरे को भी काफी व्यापक बनाया है। अब केवल मिट्टी खोदने या पारंपरिक सार्वजनिक कार्यों तक योजना सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांवों में दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। सभी परियोजनाओं को National Rural Infrastructure Stack से जोड़ा जाएगा, ताकि पूरे देश में ग्रामीण विकास के लिए एक समान और डिजिटल ढांचा तैयार हो सके।
नई योजना के तहत सरकार ने चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।
1. जल सुरक्षा: जल संरक्षण, तालाबों का पुनर्जीवन, भूजल रिचार्ज, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और बड़े पैमाने पर वनीकरण।
2. ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर: ग्रामीण सड़कें, सार्वजनिक भवन, स्कूल, स्वच्छता प्रणाली, सोलर ऊर्जा परियोजनाएं और आवास से जुड़े विकास कार्य।
3. आजीविका बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट: कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, ग्रामीण भंडारण, स्थानीय बाजार, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा।
4. आपदा प्रबंधन: बाढ़ सुरक्षा, तटबंध निर्माण, राहत शिविर, पुनर्वास कार्य, जंगल की आग रोकने और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाली परियोजनाएं।
सरकार का दावा है कि नई योजना का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण गरीब परिवारों को मिलेगा। विशेष रूप से अकुशल श्रमिक, छोटे और सीमांत किसान, महिला श्रमिक, कृषि और मत्स्य पालन से जुड़े परिवार तथा जल संकट या प्राकृतिक आपदा प्रभावित गांव इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे।
इसके अलावा कौशल विकास और स्थानीय बाजार से जोड़ने के कारण ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होने की उम्मीद है।
सरकार ने शुरुआती चरण में इस योजना के लिए करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक प्रावधान का संकेत दिया है। हालांकि अंतिम बजट राशि हर वर्ष केंद्रीय बजट में तय की जाएगी और राज्यों की भागीदारी के आधार पर इसमें बदलाव संभव होगा। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएंगी।
नई योजना लागू होने के साथ सरकार की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती हर पात्र परिवार को 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना होगी। इसके अलावा समय पर मजदूरी का भुगतान, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी बनाना और वर्ष 2047 तक टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण सरकार की बड़ी परीक्षा होगी। यदि इन मोर्चों पर प्रदर्शन कमजोर रहता है तो योजना को लेकर सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है।
मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना था, जबकि VB G-RAM-G रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण विकास का दीर्घकालिक मॉडल तैयार करने पर केंद्रित है। नई व्यवस्था में रोजगार को कृषि, जल संरक्षण, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और आजीविका से जोड़ा गया है, ताकि गांवों में ऐसी स्थायी परिसंपत्तियां बन सकें जो आने वाले वर्षों में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देती रहें।
सरकार का मानना है कि यह कानून केवल रोजगार गारंटी योजना नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 के विजन को जमीन पर उतारने का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। वहीं इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्यों के सहयोग से रोजगार, भुगतान और विकास कार्यों को कितनी प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाता है।
Location : New Delhi
Published : 1 July 2026, 11:18 AM IST