दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल खुद पेश करेंगे अपनी दलीलें- आखिर खुद बहस करने के पीछे क्या है रणनीति?

दिल्ली की सियासत में फिर हलचल तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल का अचानक हाई कोर्ट में खुद पेश होकर बहस करने का फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। इसके पीछे की असली वजह क्या है, यह जानकर आप भी चौंक सकते हैं…

Updated : 6 April 2026, 9:33 AM IST
google-preferred

New Delhi: दिल्ली के कथित शराब घोटाले (एक्साइज पॉलिसी स्कैम) से जुड़े मामले में सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद अदालत में उपस्थित होकर अपनी दलीलें रख सकते हैं। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों हाई कोर्ट पहुंचे केजरीवाल?

केजरीवाल की ओर से दाखिल याचिका केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के संदर्भ में है। दरअसल, यह विवाद उस आदेश से जुड़ा है जिसमें ट्रायल कोर्ट ने समन की कथित अवहेलना के मामले में केजरीवाल को बरी कर दिया था।

आबकारी केस में नया मोड़: केजरीवाल कल हाईकोर्ट में रखेंगे पक्ष… सुनवाई से पहले बड़ा अपडेट

22 जनवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ED यह साबित नहीं कर पाई कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अनदेखी की। इसके बाद 30 मार्च को ED ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

रिक्यूजल की मांग पर होगी सुनवाई

इस मामले में एक और अहम पहलू जज के रिक्यूजल (मामले से हटने) की मांग है। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, आज इस आवेदन पर बहस हो सकती है और इसी दौरान केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले भी आरोपी पक्ष जज की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुका है, हालांकि अदालत ने केस ट्रांसफर करने की मांग को पहले खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट ने जारी किया था नोटिस

यह मामला ED की उस याचिका से जुड़ा है जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को चुनौती दी गई है। हाल ही में हाई कोर्ट ने केजरीवाल को नोटिस जारी कर 29 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने यह भी कहा था कि केजरीवाल को पहले भी नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पेशी नहीं दी थी। साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड भी मंगाने का आदेश दिया है।

खुद बहस करने का दूसरा बड़ा उदाहरण

अगर केजरीवाल खुद अदालत में बहस करते हैं, तो यह उनके लिए दूसरा बड़ा मौका होगा जब कोई वरिष्ठ राजनीतिक नेता अदालत में खुद अपनी पैरवी करेगा। इससे पहले ममता बनर्जी भी एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश होकर दलीलें दे चुकी हैं।

शराब कांड मामला: केजरीवाल के बरी होने के खिलाफ CBI का सख्त रुख, निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल का यह कदम न केवल कानूनी रणनीति का हिस्सा है, बल्कि इससे जनता के बीच एक मजबूत संदेश देने की भी कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक और कानूनी असर

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस पहले से ही देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में केजरीवाल का खुद अदालत में पेश होना इस मामले को और अधिक चर्चाओं में ला सकता है। अब सभी की नजरें आज की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा और क्या जज के रिक्यूजल की मांग स्वीकार की जाती है या नहीं।

Location :  New Delhi

Published :  6 April 2026, 9:33 AM IST

Advertisement