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बॉम्बे HC का बड़ा आदेश (Image: Canva)
Bombay: पति की मौत के बाद क्या तलाकशुदा पत्नी गुजारा-भत्ते की रकम बढ़ाने की मांग कर सकती है? इस सवाल पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर पति की मौत हो चुकी है तो पहले से तय की गई गुजारा-भत्ते की रकम में बढ़ोतरी की मांग नहीं की जा सकती। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी का पहले से तय गुजारा-भत्ता खत्म नहीं होता। वह अपने जीवनभर उस रकम और बकाया राशि को पति की संपत्ति यानी एस्टेट से वसूल कर सकती है।
यह फैसला जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी का गुजारा-भत्ता उसका निजी अधिकार है, जिसे किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
फैसला लिखने वाली जस्टिस भारती डांगरे ने कहा कि गुजारा-भत्ते का अधिकार पत्नी की जिंदगी तक बना रहता है। यह अधिकार उसकी मृत्यु के साथ खत्म हो जाता है। लेकिन पति की मौत से पहले जो गुजारा-भत्ता तय हो चुका है, उसे पति की संपत्ति से वसूला जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि पति के निधन के बाद उसकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। ऐसे में उसके वारिसों पर नई या बढ़ी हुई देनदारी नहीं डाली जा सकती। बेंच ने यह भी कहा कि अगर पति की मौत के बाद गुजारा-भत्ता बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी तो इससे कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं और उत्तराधिकार मामलों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
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यह मामला मुंबई के मालाबार हिल की एक महिला से जुड़ा था। दोनों पक्षों की शादी साल 1973 में हुई थी। कुछ समय बाद दोनों अलग रहने लगे थे। करीब 22 साल बाद 17 मई 1999 को फैमिली कोर्ट ने दोनों का तलाक मंजूर कर दिया था। तलाक के आदेश में पति को पत्नी को हर महीने 6 हजार रुपये गुजारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। बाद में दोनों पक्षों की अपीलें खारिज हो गईं और यह आदेश अंतिम बन गया।
इसके बाद मार्च 2012 में पति की मौत हो गई। पति की मौत के बाद महिला ने फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल कर बकाया राशि की वसूली और गुजारा-भत्ता बढ़ाने की मांग की। महिला का कहना था कि 1999 में तय की गई 6 हजार रुपये की रकम अब बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्च के हिसाब से काफी कम है।
फरवरी 2023 में फैमिली कोर्ट ने महिला की याचिका पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने माना था कि पति की मौत के बाद भी बकाया गुजारा-भत्ता उसकी संपत्ति से वसूला जा सकता है। फैमिली कोर्ट ने कहा था कि गुजारा-भत्ता देने की जिम्मेदारी पति की संपत्ति पर बनी रहेगी। हालांकि कोर्ट ने रकम बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद महिला ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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इस मामले में हाई कोर्ट के सामने दो बड़े सवाल थे। पहला सवाल था कि क्या तलाक के आदेश में तय गुजारा-भत्ता पति की मौत के बाद उसकी संपत्ति से वसूला जा सकता है? कोर्ट ने इसका जवाब हां में दिया। यानी पत्नी पहले से तय राशि को पति की संपत्ति से ले सकती है। दूसरा सवाल था कि क्या पति की मौत के बाद गुजारा-भत्ते की रकम बढ़ाई जा सकती है?
इस पर कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि रकम बढ़ाने के लिए पति और पत्नी दोनों का जीवित होना जरूरी है। क्योंकि बढ़ोतरी की मांग एक नए अधिकार की मांग होती है, जिस पर दोबारा सुनवाई की जरूरत पड़ती है।
हाई कोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस बढ़ाने का अधिकार वैवाहिक रिश्ते से जुड़ा व्यक्तिगत अधिकार है। इसके साथ पति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। पति की मौत के बाद वह जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। इसे उसके कानूनी वारिसों पर नई जिम्मेदारी के रूप में लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों में नई मांगों की अनुमति दी गई तो विरासत में मिली संपत्ति को लेकर लगातार विवाद पैदा हो सकते हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला तलाक, मेंटेनेंस और उत्तराधिकार कानून से जुड़े मामलों में एक अहम मिसाल माना जा रहा है।
Location : Bombay
Published : 17 June 2026, 8:57 AM IST