यूपी पंचायत चुनाव से जुड़ी की बड़ी खबर: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाये जाने के मामले में बड़ा मोड़

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के योगी सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इसे पंचायती राज अधिनियम के खिलाफ बताया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई आज (3 जून) के लिए तय की गई है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 3 June 2026, 8:45 AM IST
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Lucknow:  उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से आज यानी 3 जून को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किए जाने के आदेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ओमप्रकाश प्रजापति ने इसे पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत बताया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की बेंच कर रही है।

याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12(3)(क) के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल अधिकतम पांच वर्ष का होता है। ऐसे में कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हीं प्रधानों को प्रशासक बनाना कानून की मंशा के विपरीत है। उनका तर्क है कि पहले की परंपरा के अनुसार एडीओ पंचायत या अन्य सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, न कि निवर्तमान प्रधानों को।

कोर्ट का निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि वह सरकार से स्पष्ट जवाब लेकर आज यानी 3 जून को पक्ष रखें।

सरकार का आदेश और व्यवस्था

राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें अगले छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह आदेश प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों पर लागू होगा। 26 मई को सभी पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह व्यवस्था लागू की गई।

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सरकार का पक्ष

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का कहना है कि पंचायत चुनाव में देरी और पिछड़ा वर्ग आरक्षण प्रक्रिया लंबी होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। इससे सफाई, पेयजल, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य विकास कार्यों को जारी रखने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक सीमाएं तय

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रशासक बनाए गए ग्राम प्रधान बड़े या नीति से जुड़े फैसले नहीं ले सकेंगे। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी और जिलाधिकारी की मंजूरी अनिवार्य होगी।

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पुरानी व्यवस्था से बदलाव

अब तक परंपरा के अनुसार ग्राम प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने पर एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था। इस बार व्यवस्था बदलने से यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

Location :  Lucknow

Published :  3 June 2026, 8:40 AM IST

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