EPFO Investment Fraud: ईपीएफओ निवेश के नाम पर करोड़ों का घोटाला; रिलायंस केपिटल के खिलाफ CBI का बड़ा एक्शन; पढ़ें पूरी पड़ताल

CBI ने EPFO के 2,500 करोड़ निवेश से जुड़े मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि कथित फंड डायवर्जन और धोखाधड़ी के कारण EPFO को 1,816.22 करोड़ का नुकसान हुआ। मामले में आपराधिक साजिश और वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी गई है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 1 August 2026, 2:37 PM IST
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Mumbai: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के हजारों करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL), उसके पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और वित्तीय अनियमितताओं के जरिए EPFO को भारी नुकसान पहुंचाया गया। CBI अब पूरे मामले में फंड के इस्तेमाल, कथित फंड डायवर्जन और सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच कर रही है।

31 जुलाई को दर्ज हुई FIR

CBI ने 31 जुलाई 2026 को यह एफआईआर भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन आने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की। शिकायत में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके तत्कालीन चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और कथित आपराधिक कदाचार के आरोप लगाए गए हैं।

2,500 करोड़ के निवेश से जुड़ा मामला

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी किए थे। इन डिबेंचरों में EPFO ने रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड समेत चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के माध्यम से करीब 2,500 करोड़ का निवेश किया था। इन NCDs की परिपक्वता (मैच्योरिटी) वर्ष 2023 और 2024 में होनी थी, लेकिन आरोप है कि भुगतान समय पर नहीं किया जा सका।

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1,816.22 करोड़ के नुकसान का आरोप

CBI के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित रूप से धोखाधड़ी वाले वित्तीय लेन-देन किए गए और निवेश किए गए फंड को दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया गया। इसके चलते रिलायंस कैपिटल NCDs का रिडेम्पशन (भुगतान) नहीं कर सकी। शिकायत में कहा गया है कि इस कारण EPFO को 1,007.55 करोड़ की मूल राशि का नुकसान हुआ, जबकि 808.67 करोड़ का ब्याज भी प्रभावित हुआ। इस तरह कुल कथित वित्तीय नुकसान 1,816.22 करोड़ बताया गया है।

CBI किन पहलुओं की करेगी जांच?

CBI ने मामले में विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका थी, सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की क्या जिम्मेदारी बनती है तथा निवेश की गई राशि का अंतिम उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। जांच में बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन, निवेश से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्यों की भी पड़ताल की जाएगी।

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पहले भी दर्ज हो चुकी हैं कई FIR

CBI ने बताया कि इससे पहले भी रिलायंस एडीए (ADA) समूह की विभिन्न कंपनियों से जुड़े मामलों में कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) के खिलाफ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की शिकायतों के आधार पर सात मामले दर्ज किए गए थे।

Location :  New Delhi

Published :  1 August 2026, 2:37 PM IST

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