सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत या सोची-समझी हत्या? अब CBI करेगी जांच

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 2 September 2026, 12:28 PM IST
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Mumbai: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में लगभग छह साल बाद एक नया मोड़ आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपी जाए। कोर्ट ने CBI को FIR दर्ज करने और मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है। यह आदेश दिशा के पिता सतीश सालियन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

CBI दर्ज करेगी FIR

हाई कोर्ट ने CBI के मुंबई जोन के जॉइंट डायरेक्टर को इस काम के लिए एक सीनियर और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। यह अधिकारी दिशा के पिता का बयान दर्ज करने के बाद औपचारिक FIR दर्ज करेगा। इसके अलावा, मुंबई पुलिस को इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, सबूत और जरूरी रिकॉर्ड CBI को सौंपने होंगे।

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कोर्ट ने शुरुआती पुलिस जांच पर जताया असंतोष

इस मामले की सुनवाई जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच को लेकर कई सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब परिवार ने हत्या और अन्य गंभीर परिस्थितियों की आशंका जताई थी, तो पुलिस ने FIR के बजाय केवल एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) क्यों दर्ज की।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठाए गए सवाल

पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी कोर्ट के सामने रखे गए। पता चला कि दिशा का पोस्टमार्टम एक ही डॉक्टर ने किया था, जबकि ऐसे संवेदनशील मामलों में दो डॉक्टरों की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है। शरीर पर मिली चोटों को लेकर भी विरोधाभासी जानकारी सामने आई। गौरतलब है कि घटना के कई सालों बाद तक परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट या ADR की कॉपी नहीं मिली थी।

2020 में हुई थी दिशा की मौत

दिशा सालियन की मौत 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने इस घटना को आत्महत्या का मामला माना था। हालांकि, उनके पिता ने हत्या समेत गंभीर आरोप लगाए थे और मामले में प्रभावशाली लोगों की संभावित संलिप्तता पर सवाल उठाए थे।

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CBI जांच का मतलब दोषी होना नहीं

हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जांच CBI को सौंपने और FIR दर्ज करने के आदेश का मतलब किसी को दोषी ठहराना नहीं है। आगे की कानूनी कार्रवाई तभी की जाएगी जब जांच के दौरान पर्याप्त सबूत मिलेंगे। अब CBI इस मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों की नए सिरे से जांच करेगी।

Location :  Mumbai

Published :  2 September 2026, 12:28 PM IST

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