“बेटा! जब मैं मर जाऊं तो मुझे जलाना नहीं” ये कहकर मोहन प्रसाद ने छोड़ी दुनिया, जानें मौत के बाद परिजनों ने क्या किया?

देवरिया के सोनूघाट में 65 वर्षीय मोहन प्रसाद के निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए शव को जलाने के बजाय दफना दिया।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 2 September 2026, 1:01 PM IST
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Deoria: सदर कोतवाली क्षेत्र के सोनूघाट गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। यहां लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे मोहन प्रसाद उम्र 65 वर्ष की मौत के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार हिंदू रीति-रिवाज से अलग उनके शव को दफन कर दिया। घटना के बाद सोनूघाट से लेकर देवरिया शहर तक तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

काफी दिनों से चल रही थी तबीयत खराब

बताया जा रहा है कि मोहन प्रसाद की काफी दिनों से तबीयत खराब चल रही थी और उनका इलाज गोरखपुर के एक निजी/ फातिमा अस्पताल में चल रहा था। हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों की सलाह पर परिजन उन्हें एंबुलेंस के जरिए घर लेकर रविवार को पहुंचे। अपने निवास स्थान सोनूघाट पहुंचने के उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई परिजनों के अनुसार मोहन प्रसाद की मौत हो गई। मोहन प्रसाद ने बीमारी के दौरान अपनी इच्छा जाहिर की थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को जलाने के बजाय दफन किया जाए। मोहन प्रसाद की इच्छा को परिवार ने सर्वोपरि मानते हुए उनके बड़े पुत्र विजय एवं संदीप सहित परिवार के अन्य सदस्यों तथा रिश्तेदारों ने आपसी सहमति से शव को दफन करने का निर्णय लिया।

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इसके बाद परिवार के लोग शव को कब्रिस्तान ले गए और वहां अंतिम विदाई दी। बताया जा रहा है कि शव को दफन किए जाने के दौरान बड़ी संख्या में अलग-अलग समुदायों के लोग भी मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान लोगों के बीच घटना को लेकर चर्चा होती रही।

अंतिम इच्छा या परंपरा? उठे कई सवाल

मोहन प्रसाद के दफन किए जाने की खबर फैलते ही शहर और आसपास के इलाकों में इसको लेकर बहस छिड़ गई। कुछ हिंदू सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि मोहन प्रसाद हिंदू थे तो उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया जाना चाहिए था। वहीं दूसरी ओर कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि यह परिवार का निजी मामला है और यदि मृतक ने स्वयं दफन किए जाने की इच्छा जाहिर की थी तो परिवार ने उसी इच्छा का सम्मान किया है।

परिवार में पसरा मातम

घटना को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आने लगी हैं। हालांकि, पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतिम निर्णय मृतक के परिजनों ने उनकी कथित अंतिम इच्छा के आधार पर लिया।
फिलहाल मोहन प्रसाद की मौत से परिवार में मातम पसरा है, लेकिन उनके अंतिम संस्कार का तरीका पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मृतक की अंतिम इच्छा और पारिवारिक परंपरा में टकराव होने पर प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए?

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इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील मामले को किसी धार्मिक विवाद का रूप देने के बजाय आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

Location :  Deoria

Published :  2 September 2026, 1:01 PM IST

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