हिंदी
अन्ना हजारे (फोटो सोर्स- Pinterest)
Mumbai: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल देखने को मिला है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे को अब तक का सबसे तगड़ा झटका लगा है। उनके दल के 6 मौजूदा लोकसभा सांसदों ने एक साथ पाला बदल लिया है। इन सभी सांसदों ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस अप्रत्याशित और बड़े दलबदल के बाद पूरे राज्य की सियासत में गरमागरम बहस छिड़ गई है और महाविकास अघाड़ी के खेमे में मायूसी का माहौल है।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और तोड़-फोड़ की राजनीति पर देश के वरिष्ठ और सम्मानित समाजसेवी अन्ना हजारे ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने पाला बदलने वाले जनप्रतिनिधियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह बार-बार निजी स्वार्थ के लिए पार्टियां बदलना हमारे जीवंत लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। अन्ना हजारे ने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि आज की राजनीति में न तो कोई विश्वास बचा है, न वफादारी और न ही कोई आदर्शवाद बचा है।
उद्धव ठाकरे को डबल झटका: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से 6 सांसद बागी, अब BMC में भी कम हुई शिवसेना की ताकत
अन्ना हजारे ने दलबदलुओं पर प्रहार करते हुए कहा कि बार-बार पार्टियां बदलने से राजनीति में वफादारी, विचारधारा और आदर्शवाद पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जो लोग देश और समाज की सेवा करने का सच्चा जज्बा दिल में रखते हैं, वे कभी भी इस तरह अपनी पार्टी और विचारधारा से समझौता नहीं करते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कुछ नेता सिर्फ और सिर्फ अपने निजी हितों को साधने के लिए और सत्ता सुख भोगने के लिए इस तरह के अनैतिक कदम उठाते हैं, जिससे जनता का भरोसा टूटता है।
वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने न केवल दलबदल की इस गंदी राजनीति पर निशाना साधा है, बल्कि उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) कानून में किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ भी सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र की शिंदे सरकार को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि अगर आरटीआई नियमों में किए गए संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो वे आगामी 5 जुलाई से राज्य सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़ा जन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।
शिवसेना यूबीटी में टूट के बीच राउत का बयान चर्चा में, कांग्रेस ने किया खुलकर समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य में एक अजीब सी असमंजस की स्थिति बन गई है। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने पाले में 6 नए लोकसभा सांसदों के आने से अपनी राजनीतिक ताकत और कद बढ़ने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अन्ना हजारे के कड़े और आक्रामक तेवरों ने महाराष्ट्र सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। 5 जुलाई से होने वाले आंदोलन की चेतावनी ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और शिंदे सरकार को सीधे तौर पर भारी दबाव में ला खड़ा किया है।
Location : Mumbai
Published : 24 June 2026, 10:14 AM IST