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नेशनल मेडिकल कमीशन ने गंभीर नियम उल्लंघन के चलते जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी है। कॉलेज पहले से ही प्रवेश विवाद और राजनीतिक-सामाजिक विरोधों के कारण चर्चा में था। छात्रों को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।
श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज (Img- Internet)
Jammu: जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने रद्द कर दी है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि कॉलेज द्वारा मेडिकल शिक्षा से जुड़े न्यूनतम मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया है। इसके चलते कॉलेज को आगे एमबीबीएस पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
NMC ने स्पष्ट किया है कि कॉलेज में वर्तमान में पढ़ रहे एमबीबीएस छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को समन्वय कर जल्द व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इस पर विशेष जोर दिया गया है।
श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज लंबे समय से विवादों में घिरा रहा है। कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों के आवंटन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपों के अनुसार 50 में से 42 सीटें मुस्लिम छात्रों को दी गईं, जबकि हिंदू छात्रों को केवल सात और एक सीट सिख छात्र को मिली। इस प्रवेश सूची को लेकर कई हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
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विरोध कर रहे संगठनों का कहना था कि यह मेडिकल कॉलेज माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अधीन है और इसका संचालन भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान से होता है। ऐसे में हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसे लेकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति का गठन किया गया, जिसमें करीब 60 सामाजिक और दक्षिणपंथी संगठन शामिल हुए।
संघर्ष समिति ने पहले कॉलेज की एडमिशन लिस्ट को रद्द करने की मांग की थी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो समिति ने मेडिकल कॉलेज को ही बंद करने की मांग शुरू कर दी। समिति का तर्क था कि श्राइन बोर्ड के संसाधनों से मिलने वाले लाभ मुख्य रूप से हिंदू समुदाय के हित में होने चाहिए।
नेशनल मेडिकल कमीशन (Img- Internet)
इस विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मेडिकल कॉलेज को बंद करने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि बेहतर होगा कि इस कॉलेज को बंद कर दिया जाए और यहां पढ़ रहे छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय से छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की अपील की थी।
हालांकि NMC ने अपने आदेश में मान्यता रद्द करने का कारण नियमों का उल्लंघन बताया है, लेकिन संघर्ष समिति इसे अपनी जीत के रूप में देख रही है। समिति के एक सदस्य ने कहा कि कॉलेज बंद करना ही सबसे बेहतर विकल्प था, अन्यथा भविष्य में और बड़े विवाद खड़े हो सकते थे।
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फिलहाल NMC के निर्देश के बाद छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि छात्रों को किन संस्थानों में स्थान दिया जाएगा।