हिंदी
युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जानिए इसके कारण, शुरुआती लक्षण और बचाव के आसान उपाय। समय रहते जांच और सही लाइफस्टाइल से हाइपरटेंशन को किया जा सकता है नियंत्रित।
हाई ब्लड प्रेशर (Img Source: Google)
New Delhi: हाई ब्लड प्रेशर, जिसे मेडिकल भाषा में Hypertension कहा जाता है, अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। हाल के वर्षों में स्कूल जाने वाले किशोरों से लेकर 20 से 30 साल के युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह एक “साइलेंट” समस्या है, जो बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती रहती है। पहले 40 साल के बाद लोग बीपी को लेकर सतर्क होते थे, लेकिन अब कम उम्र के मरीज बड़ी संख्या में क्लीनिक पहुंच रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली इसका सबसे बड़ा कारण है।
लगातार तनाव और चिंता भी अहम भूमिका निभाते हैं। जब शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, तो ब्लड वेसल्स संकरी हो जाती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है। मोटापा भी बड़ा जोखिम कारक है, क्योंकि अतिरिक्त वजन दिल पर दबाव डालता है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का सेवन कम उम्र में ही बीपी असंतुलन का कारण बन सकता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से हाई बीपी का इतिहास है, उनमें इसका खतरा और अधिक रहता है।
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। कई लोग सालों तक बिना जानकारी के इस समस्या के साथ जीते रहते हैं।
Health Tips: डिहाइड्रेशन से आंखों पर पड़ता है सीधा असर, ये समस्याएं हो सकती हैं गंभीर
कुछ मामलों में ये संकेत दिख सकते हैं:
अगर इसे अनदेखा किया जाए तो आगे चलकर यह हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी डैमेज और आंखों की रोशनी पर असर डाल सकता है।
Health Tips: भारतीय किचन के लिए 5 सबसे हेल्दी कुकिंग ऑयल, जानें कौन-सा तेल है हेल्दी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 18 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार बीपी की जांच जरूर करानी चाहिए। समय रहते की गई जांच और छोटे बदलाव भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।