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नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में पाया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से औसतन केवल 3 प्रतिशत वजन कम होता है, जो पारंपरिक डाइट प्लान जितना ही प्रभावी है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य लाभ के लिए कम से कम 5 प्रतिशत वजन घटाना जरूरी माना जाता है।


आजकल वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। कई लोग इसे चमत्कारी उपाय मानते हैं, लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह रिसर्च प्रतिष्ठित संस्था Cochrane द्वारा की गई, जिसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका के 1,995 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन में कमी तो होती है, लेकिन यह पारंपरिक संतुलित डाइट से अधिक प्रभावी नहीं है। (Img: Google)



रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग डाइट पैटर्न की तुलना करने पर वजन घटाने में बड़ा अंतर नहीं मिला। औसतन इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने वालों का लगभग 3 प्रतिशत वजन कम हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि सेहत पर स्पष्ट सकारात्मक प्रभाव देखने के लिए कम से कम 5 प्रतिशत वजन कम होना जरूरी माना जाता है, जिससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का खतरा घट सकता है। ऐसे में 3 प्रतिशत की कमी को बहुत बड़ा बदलाव नहीं माना जा सकता। (Img: Google)



अध्ययन में कई तरह की फास्टिंग पद्धतियों को शामिल किया गया, जैसे हर दूसरे दिन उपवास, 5:2 डाइट (हफ्ते में दो दिन कम कैलोरी लेना) और टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग, जिसमें दिन के तय घंटों में ही भोजन किया जाता है। नतीजों से स्पष्ट हुआ कि इनमें से कोई भी तरीका सामान्य डाइट प्लान से ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुआ। यानी केवल खाने का समय बदल देने से बड़े परिणाम मिलना तय नहीं है। (Img: Google)



रिसर्च की कुछ सीमाएं भी सामने आईं। अधिकांश अध्ययन 12 महीने से कम अवधि के थे और उनकी गुणवत्ता मध्यम स्तर की रही। प्रतिभागियों से यह भी नहीं पूछा गया कि वे इस डाइट से कितने संतुष्ट थे या इसे लंबे समय तक अपनाना कितना आसान था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फास्टिंग का असर शरीर की जैविक घड़ी और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर पड़ सकता है, लेकिन इंसानों में इन दावों के समर्थन में अभी ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। (Img: Google)



विशेषज्ञों की राय है कि वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। केवल उपवास के भरोसे टिकाऊ और स्वस्थ परिणाम हासिल करना संभव नहीं है। इसलिए ऐसा तरीका चुनना बेहतर है जिसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके और जो संपूर्ण स्वास्थ्य को ध्यान में रखे। (Img: Google)
