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गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र (Image Source: Pinterest)
Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के सड़सड़ा बुजुर्ग गांव में नाली के गंदे पानी के निकास को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ एक मामूली सा विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। दोनों ओर से लाठी-डंडे, कुदाल और लोहे की धारदार रॉड निकल आईं और जमकर मारपीट हुई। इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है। घटना के बाद से गांव में कुछ समय के लिए भारी तनाव व्याप्त हो गया।
पुलिस को दी गई पहली तहरीर में गांव के निवासी जिलेदार मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनके विपक्षी हीरा और राजदेव यादव उनके परिवार के साथ मिलकर जबरन जिलेदार की जमीन से नाली का पानी बहा रहे थे। जब जिलेदार मिश्रा ने अपनी जमीन पर बह रहे उस अवैध पानी के निकास को बंद कर दिया, तो विपक्षी पक्ष पूरी तरह आगबबूला हो गया। आरोप है कि हीरा पक्ष के रितेश, राजनाथ, बैरागी और किसुन समेत कई लोग लामबंद होकर जिलेदार के घर पर धमक पड़े। जब जिलेदार के बेटों, वीरेंद्र और शैलेंद्र ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो आरोपियों ने लोहे की रॉड से हमला कर जिलेदार को बेहोश कर दिया।
वहीं दूसरी तरफ, दूसरे पक्ष के राजदेव यादव ने पुलिस के सामने बिल्कुल अलग कहानी पेश की है। राजदेव का कहना है कि 17 जून की शाम वह अपनी पशुशाला के सामने मवेशियों को नहला रहे थे, और पानी उनके खुद के खेत की तरफ जा रहा था। इसी बात को लेकर जिलेदार मिश्रा वहां आए और गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर जिलेदार ने अपने बेटों जयप्रकाश, शैलेंद्र और रिंकी को ललकार दिया। राजदेव का आरोप है कि वीरेंद्र मिश्रा घर के अंदर से कुदाल (पैना हथियार) लेकर आए और उनके कंधे पर जानलेवा वार कर दिया, जिससे वह लहूलुहान हो गए।
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इस खूनी भिड़ंत की सूचना मिलते ही गोला थाने की पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों की क्रॉस तहरीर के आधार पर कुल 10 लोगों (दोनों पक्षों से पांच-पांच) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं जैसे 191(2), 115(2), 351(3) और 110 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।
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ग्रामीण इलाकों में नाली के पानी को लेकर होने वाले ये खूनी संघर्ष कोई पहली घटना नहीं हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद पिछले कई महीनों से सुलग रहा था। गांव में उचित जल निकासी (प्रॉपर ड्रेनेज सिस्टम) न होने और ग्राम पंचायत द्वारा नालियों का निर्माण सही तरीके से न कराए जाने के कारण ही ऐसी नौबत आई है। अगर समय रहते ग्राम प्रधान या स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप कर पानी के निकास की सरकारी व्यवस्था कर दी होती, तो दो पड़ोसी इस तरह एक-दूसरे के खून के प्यासे न बनते।
Location : Gorakhpur
Published : 19 June 2026, 10:57 AM IST