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कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश
Kanpur: कानपुर में फर्जीवाड़े का एक ऐसा बड़ा खेल सामने आया है जिसने पूरे शिक्षा सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमिश्नरेट पुलिस की एसआईटी, साइबर सेल और बेकनगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो पिछले कई सालों से देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट सप्लाई कर रहा था। इस कार्रवाई में गिरोह का मास्टरमाइंड समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से भारी मात्रा में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज और बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद हुआ है।
कानपुर पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि चमनगंज और आसपास के इलाकों में कुछ लोग विश्वविद्यालयों और बोर्डों की नकली डिग्रियां तैयार कर रहे हैं। इसी इनपुट पर एसआईटी और साइबर सेल ने बेकनगंज पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया। देर रात की गई इस छापेमारी में पुलिस ने पूरे गिरोह को रंगे हाथों पकड़ लिया।
इस कार्रवाई में पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ, नूरुद्दीन, हसन आसिफ और आमिर अहमद शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जियाउल हसन इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है और वही इसे ऑपरेट करता था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह किसी छोटे स्तर पर नहीं बल्कि एक प्रोफेशनल सेटअप की तरह काम कर रहा था, जहां अलग-अलग लोग डाटा एंट्री, प्रिंटिंग और सप्लाई का काम देखते थे।
पूछताछ में जो खुलासा हुआ उसने पुलिस को भी चौंका दिया। गिरोह पिछले करीब 13 वर्षों से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था। यह लोग देश के कई राज्यों में फर्जी डिग्रियां सप्लाई कर चुके हैं और विदेशों तक भी इनका नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, जांच में ऐसे सबूत मिले हैं कि सऊदी अरब, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों तक फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज भेजे गए हैं। यह नेटवर्क एजेंटों के जरिए काम करता था, जो जरूरतमंद लोगों को फर्जी डिग्री बेचकर मोटी रकम वसूलते थे।
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पुलिस की छापेमारी में जो सामान बरामद हुआ है, उसने पूरे रैकेट की गंभीरता को उजागर कर दिया है। मौके से 62 कूटरचित मार्कशीट और डिग्री, दो लैपटॉप, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर, कलर प्रिंटर, तीन हार्ड डिस्क, 141 विश्वविद्यालयों की मोहरें, 80 होलोग्राम, 24 डाई और 830 सादे पेपर बरामद किए गए हैं।
पुलिस जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का सरगना जियाउल हसन दो बार लंदन जा चुका है। वहां रहते हुए भी वह अपने नेटवर्क को ऑपरेट करने की कोशिश करता रहा। पुलिस को शक है कि विदेश यात्रा के दौरान उसने अपने नेटवर्क को और मजबूत किया और नए एजेंट भी जोड़े। इससे इस रैकेट का दायरा और भी बड़ा हो गया था।
Location : Kanpur
Published : 9 June 2026, 3:01 PM IST