चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट का जाल: CBI अधिकारी बनकर की ठगी, 15 दिन में बुजुर्ग दंपति से लूटी पूरी जमा पूंजी

चंडीगढ़ में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 2.15 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर डराया गया और सोना तक बिकवा दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 3 June 2026, 10:37 AM IST
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Chandigarh: चंडीगढ़ के सेक्टर-47 में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति के साथ साइबर ठगों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर दंपति को 15 दिनों तक कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और उनसे कुल 2 करोड़ 15 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाया मानसिक दबाव

पीड़ित दंपति, जो बैंक से सेवानिवृत्त हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक कॉल आई थी जिसमें कॉलर ने खुद को मुंबई सीबीआई का अधिकारी बताया। ठगों ने आरोप लगाया कि उनके बैंक खातों का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा गया।

किसी से संपर्क न करने की दी सख्त हिदायत

ठगों ने दंपति को चेतावनी दी कि वे इस मामले की जानकारी किसी रिश्तेदार, मित्र या पड़ोसी से साझा न करें। धमकी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। डर के कारण दंपति पूरी तरह साइबर ठगों के जाल में फंस गए और 15 दिनों तक उनके निर्देशों का पालन करते रहे।

घर की नकदी से लेकर सोना तक बिकवाया

ठगों ने पहले दंपति से घर में रखी नकदी अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई। इसके बाद उनसे रिश्तेदारों से उधार लेकर पैसे जमा करवाने को कहा गया। जब यह राशि भी खत्म हो गई तो ठगों ने दंपति को घर का सोना बेचने के लिए मजबूर किया। सोना बेचकर मिली रकम भी साइबर अपराधियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

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मकान गिरवी रखने का दबाव, तभी खुली पोल

इसके बाद ठगों ने दंपति पर मकान के दस्तावेज गिरवी रखकर बैंक से लोन लेने और वह राशि भी ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। इसी दौरान दंपति को शक हुआ और उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद ठगों ने संपर्क तोड़ दिया, जिससे उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

साइबर थाना पुलिस कर रही जांच

घटना की जानकारी मिलते ही दंपति ने अपने परिजनों को बताया और साइबर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों की तलाश में जुटे हैं।

‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी को हिरासत में नहीं रख सकती और न ही पैसे ट्रांसफर करने का आदेश दे सकती है। यह पूरी तरह साइबर ठगों की एक नई चाल है।

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वरिष्ठ नागरिक बने आसान निशाना

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में खासकर अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों को डराते हैं और उनकी जीवनभर की जमा पूंजी हड़प लेते हैं।

Location :  Chandigarh

Published :  3 June 2026, 10:37 AM IST

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