मासूम की मौत के बाद डीजे बंद, कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का सवाल; इस त्रासदी का असली जिम्मेदार कौन?

बलरामपुर में गणेश विसर्जन के दौरान स्कूल में सात साल की बच्ची की मौत के बाद डीजे को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। डीजे मालिक और ऑपरेटर की गिरफ्तारी से लेकर पुलिसकर्मियों पर की मौत के बाद डीजे और तेज आवाज को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है।

Balrampur: गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान तेज डीजे की आवाज के बीच स्कूल में सात वर्षीय छात्रा वैष्णवी तिवारी की तबीयत अचानक बिगड़ने और बाद में उसकी मौत की घटना ने बलरामपुर को झकझोर दिया। बच्ची कक्षा दो में पढ़ती थी। घटना के बाद परिवार ने तेज आवाज को लेकर सवाल उठाए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और डीजे संचालक व ऑपरेटर को गिरफ्तार किया।

हालांकि, पुलिस जांच में अभी यह पूरी तरह स्थापित होना बाकी है कि बच्ची की मौत का सीधा कारण डीजे की आवाज ही थी।

घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय स्तर पर डीजे की तेज आवाज को लेकर सख्ती बढ़ गई। नगर क्षेत्र में डीजे पर रोक की घोषणा की गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डीजे वाहन और साउंड सिस्टम को भी जब्त किया। वहीं मेवालाल चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया और नगर कोतवाली निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

स्कूल में अचानक बिगड़ी थी बच्ची की तबीयत

घटना के समय गणेश प्रतिमा विसर्जन का जुलूस स्कूल के पास से गुजर रहा था। जुलूस में तेज आवाज में डीजे बजने की बात सामने आई। इसी दौरान कक्षा में मौजूद वैष्णवी की तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत होकर गिर पड़ी। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर डीजे की तेज आवाज को बच्ची की मौत से जोड़ते हुए कई दावे किए गए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांच शुरू की। प्रशासन ने बच्ची की मौत की परिस्थितियों की अलग से मेडिकल जांच भी कराई है, ताकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।

कार्रवाई के बाद डीजे कारोबारियों की बढ़ी चिंता

प्रशासन की सख्ती का असर अब साउंड और डीजे कारोबार से जुड़े लोगों पर भी दिखाई देने लगा है। इस कारोबार में सिर्फ डीजे मालिक ही नहीं, बल्कि साउंड ऑपरेटर, लाइट लगाने वाले, वाहन चालक, हेल्पर और दूसरे दिहाड़ी कर्मचारी भी जुड़े हैं।

गणेश उत्सव के बाद नवरात्र और दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों का सीजन कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अचानक सख्ती बढ़ने से उन लोगों की चिंता बढ़ी है जिन्होंने साउंड सिस्टम और दूसरे उपकरण खरीदने के लिए बड़ी रकम लगाई है। कई छोटे कारोबारी उपकरण खरीदने के लिए बैंक या निजी स्तर पर कर्ज लेते हैं। काम नहीं मिलने की स्थिति में उनके सामने किस्त चुकाने और परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

डीजे संचालकों ने प्रशासन से रखी अपनी मांग

घटना के बाद डीजे कारोबारियों ने भी अपनी बात प्रशासन के सामने रखी है। संचालकों की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर नियमों के तहत डीजे संचालन की अनुमति देने की मांग की गई है। कारोबारियों ने खास तौर पर आगामी दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों के साथ काम करने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन पूरी तरह रोक लगाने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जिसमें निर्धारित ध्वनि सीमा, समय और स्थान के नियमों का पालन कराया जाए।

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बलरामपुर की घटना ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ बच्ची की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ डीजे और साउंड कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका का सवाल भी सामने है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घटना की जांच और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने की व्यवस्था करना है। वहीं कारोबारी नियमों के दायरे में काम करने की अनुमति मांग रहे हैं।

Location :  Balrampur

Published :  30 September 2026, 4:30 PM IST

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