पप्पू यादव पर महिला आयोग का एक्शन! बयान या कुछ और… जानें क्या है पूरा मामला?

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के विवादित बयान पर बिहार राज्य महिला आयोग सख्त हो गया है। महिलाओं के राजनीतिक करियर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 21 April 2026, 6:39 PM IST
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Patna: बयानों की आग कभी-कभी ऐसी भड़कती है कि खुद बोलने वाला ही उसमें झुलसने लगता है। कुछ ऐसा ही हुआ पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के साथ। एक वायरल वीडियो में महिलाओं को लेकर दिए गए बेहद आपत्तिजनक बयान ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया कि अब मामला सीधे नोटिस और कार्रवाई तक पहुंच गया है। महिलाओं के सम्मान पर सवाल खड़े करने वाले इस बयान ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक गुस्से की लहर दौड़ा दी है।

महिला आयोग का सख्त एक्शन

पूरा मामला उस वक्त तूल पकड़ गया जब एक वायरल वीडियो सामने आया, जिसमें पप्पू यादव महिला आरक्षण और राजनीति में महिलाओं की भूमिका पर विवादित टिप्पणी करते नजर आए। इस वीडियो को संज्ञान में लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सांसद को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। आयोग ने साफ कहा है कि इस तरह के बयान न केवल महिलाओं का अपमान हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं। आयोग ने सांसद से जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

विवादित बयान ने मचाया तूफान

दरअसल  महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए सांसद ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब है और 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर “नेताओं के बेड” से शुरू होता है। यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। महिला संगठनों और आम लोगों ने इसे नारी शक्ति का अपमान बताते हुए कड़ी निंदा की। कई संगठनों ने सांसद से माफी की मांग भी की है।

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सफेदपोश नेताओं पर भी लगाए गंभीर आरोप

अपने बयान में पप्पू यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने देश में यौन शोषण के मामलों के लिए सफेदपोश नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। उनका दावा था कि कई मौजूदा सांसदों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं होती। हालांकि इस बयान ने उनके पहले दिए गए विवादित शब्दों की तीव्रता को कम नहीं किया, बल्कि विवाद को और गहरा कर दिया।

असम के मुख्यमंत्री पर भी अमर्यादित हमला

विवाद सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं रहा। सांसद ने हिमंता बिस्व सरमा पर भी व्यक्तिगत हमला बोलते हुए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गरमा दिया।

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महिला आरक्षण बिल पर उठाए सवाल

अपने विवादित बयान के बावजूद सांसद ने खुद को महिला आरक्षण के पक्ष में बताया। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त चर्चा और विशेषज्ञों की राय के यह बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सरकार ने इस बिल को लागू नहीं किया, लेकिन अब इसे केवल राजनीतिक फायदे के लिए पेश किया गया है। साथ ही उन्होंने ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व न देने को “साजिश” बताया और कहा कि जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी।

Location :  Patna

Published :  21 April 2026, 6:39 PM IST

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