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प्रतीकात्मक छवि (Img: Pinterest)
Bhopal: रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, बल्कि अपनापन और जिम्मेदारी निभाने से भी मजबूत होते हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक परिवार ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। बेटे की कैंसर से मौत के बाद जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, वहीं सास-ससुर ने अपनी बहू का भविष्य संवारने का फैसला लिया। उन्होंने बहू को सिर्फ बहू नहीं माना, बल्कि बेटी की तरह उसका साथ निभाया और उसका पुनर्विवाह कराया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिनेश बैरागी के बेटे कपिल की शादी वर्ष 2018 में कुलूखेड़ी गांव की रहने वाली प्रियंका से हुई थी। उस समय प्रियंका की पढ़ाई चल रही थी, इसलिए उसकी विदाई नहीं हुई थी। साल 2023 में वह ससुराल आई और कुछ ही समय में परिवार की चहेती बन गई। सास-ससुर से उसका रिश्ता भी बेहद आत्मीय हो गया।
प्रियंका की जिंदगी में मुश्किल वक्त तब आया जब उसके पति कपिल को कैंसर होने का पता चला। लंबे इलाज के बाद भी उनकी जान नहीं बच सकी और वर्ष 2024 में उनका निधन हो गया।
बेटे की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया, लेकिन इसी दुख के बीच सास-ससुर ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी। उन्होंने तय किया कि प्रियंका की जिंदगी पति की मौत के साथ खत्म नहीं होगी और उसे आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है।
दिनेश बैरागी और उनके परिवार ने प्रियंका के माता-पिता से बातचीत की और उसके पुनर्विवाह के लिए उनकी सहमति ली। इसके बाद विदिशा जिले के अरारी खेजड़ा गांव निवासी गोबिंद बैरागी के साथ प्रियंका का रिश्ता तय हुआ।
रिश्ते से लेकर शादी की तैयारियों तक की जिम्मेदारी ससुराल वालों ने उठाई। यहां तक कि शादी की रस्मों में भी उन्होंने बेटी के माता-पिता की तरह हिस्सा लिया।
भोपाल के भौंरी गांव के पास आयोजित विवाह समारोह में सबसे भावुक पल तब आया, जब प्रियंका के ससुर दिनेश बैरागी ने उसका कन्यादान किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रियंका को हमेशा बहू नहीं, बल्कि बेटी माना है। उनके मुताबिक, जिंदगी लंबी है और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद इंसान को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने समाज को भी संदेश दिया कि ऐसी परिस्थिति आने पर परिवारों को विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह के बारे में सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
प्रियंका के पिता रामबाबू बैरागी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के ससुराल वाले ही उसके पुनर्विवाह की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। उन्होंने ससुराल वालों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने उनकी बेटी को बेटी की तरह रखा और उसका नया जीवन शुरू कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
भोपाल की यह कहानी सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच की मिसाल है जिसमें किसी महिला के जीवन को उसके पति की मृत्यु के बाद खत्म नहीं माना गया। सास-ससुर ने दुख की घड़ी में बहू का साथ छोड़ने के बजाय उसका हाथ थामा और उसे नई जिंदगी की ओर बढ़ने का मौका दिया।
Location : Bhopal
Published : 4 August 2026, 9:29 AM IST